हिमाचल पंचायत चुनाव का प्रचार 24 मई को समाप्त होगा

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हिमाचल प्रदेश में तीन चरणों में होने वाले पंचायत राज चुनावों का प्रचार अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। राज्य के गांवों में 26 मई को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहले चरण के लिए सार्वजनिक प्रचार 24 मई को शाम 5 बजे समाप्त होगा, इसके बाद उम्मीदवारों को केवल दरवाजे-दरवाजे जाकर संपर्क करने और मतदाताओं के साथ निजी बैठकें करने की अनुमति होगी।

हाल के दिनों में ग्रामीण चुनावों का माहौल काफी गरमाया हुआ है, जहां स्थानीय वादे, विकास योजनाएं और सामुदायिक गठबंधन कई जिलों में प्रचार के अंतिम चरण को आकार दे रहे हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही मतदान कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। दूसरे चरण का मतदान 28 मई को होगा, जबकि तीसरे और अंतिम चरण का मतदान 30 मई को निर्धारित है। प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्यों के पदों की मतगणना मतदान के तुरंत बाद उसी दिन शुरू होगी, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्यों के अंतिम परिणाम 31 मई को आने की उम्मीद है।

युवाओं की भागीदारी से बदल रही ग्रामीण राजनीति

इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण बदलाव युवा मतदाताओं और उम्मीदवारों की बढ़ती उपस्थिति है। इस वर्ष पंचायत राज चुनावों में 52,000 से अधिक मतदाता पहली बार मतदान करेंगे।

हिमाचल प्रदेश में लगभग 50.79 लाख मतदाता चुनावों में भाग लेने के लिए योग्य हैं। कई पंचायतों में युवा उम्मीदवार सीधे तौर पर लंबे समय से स्थापित स्थानीय राजनीतिक नेटवर्कों को चुनौती दे रहे हैं। नए चेहरे प्रधान से लेकर उप-प्रधान तक के पदों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, जो ग्रामीण नेतृत्व में एक व्यापक पीढ़ीय बदलाव को दर्शाता है।

चुनाव 3,758 पंचायतों में हो रहे हैं, जहां हजारों उम्मीदवार विभिन्न स्थानीय निकायों और वार्ड स्तर के पदों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

हालांकि, सभी जगह चुनाव आवश्यक नहीं होंगे। प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्य पदों के लिए सैकड़ों उम्मीदवार पहले से ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। कुछ क्षेत्रों में इसे स्थानीय राजनीतिक सहमति का संकेत माना जा रहा है, जबकि अन्य में यह चुनावी प्रतिस्पर्धा की अनुपस्थिति पर सवाल उठाता है।

जिलों के बीच स्पष्ट भिन्नताएं

चुनाव का पैमाना जिलों के बीच काफी भिन्न है। कांगड़ा राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन जिला है, जहां लगभग 12 लाख मतदाता हैं, जबकि लाहौल-स्पीति में सबसे कम मतदाता हैं। कुछ पंचायतों में हजारों पंजीकृत मतदाता हैं, जबकि कुछ वार्डों में 25 से भी कम।

यह अंतर हिमाचल की ग्रामीण राजनीतिक परिदृश्य की सामाजिक और भौगोलिक विविधता को दर्शाता है।

चुनाव अधिकारियों और जिला प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण मतदान के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मतदान टीमों का अंतिम रिहर्सल किया जा रहा है, जिसके बाद उन्हें उनके निर्धारित मतदान केंद्रों पर भेजा जाएगा।

अब जबकि प्रचार का समय समाप्त हो रहा है, हिमाचल के गांव मतदान के दिन से पहले अंतिम राजनीतिक दौड़ में प्रवेश कर रहे हैं। सड़कें, जल आपूर्ति, नौकरियां, स्थानीय नेतृत्व और विकास तक पहुंच कई ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्रीय मुद्दे बने हुए हैं, क्योंकि उम्मीदवार अंतिम बार मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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