काठमांडू की सड़कों पर इन दिनों एक साथ कई तरह के प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। सिंहदरबार परिसर से लेकर माइतीघर मंडला तक, हर जगह किसी न किसी वर्ग की नाराज़गी सड़क पर उतर आई है। कहीं सरकारी नौकरी छिनने का डर है, तो कहीं किसानों की मेहनत का सही दाम न मिलने का गुस्सा।
सिंहदरबार के भीतर करार यानी अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी बीते दिन से काम छोड़कर धरने पर बैठे हैं। ठीक बाहर गेट पर बिनु यादव नाम की एक महिला पिछले तीन दिनों से अकेले धरना दे रही हैं। थोड़ा और आगे बढ़ें तो नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) से जुड़े छात्र संगठन अनेरास्ववियु का प्रदर्शन चल रहा है। कुछ किलोमीटर दूर माइतीघर में किसानों ने सड़क पर टमाटर फेंककर अपना विरोध जताया।
इतना ही नहीं, जनकपुर से ब्याज के जाल में फंसे पीड़ित पैदल चलकर काठमांडू की ओर आ रहे हैं। और संसद के भीतर बीते दो महीने से विपक्षी दल लगातार हंगामा कर रहे हैं। यानी सड़क से लेकर सदन तक, नेपाल में इस वक्त हर तरफ आंदोलन ही आंदोलन नज़र आ रहा है।
आइए एक-एक करके समझते हैं कि आखिर ये सारे विरोध-प्रदर्शन किस बात को लेकर हो रहे हैं।
टमाटर सड़क पर क्यों फेंके किसानों ने
माइतीघर मंडला की सड़क पर बिखरे लाल टमाटर देखकर कई लोगों को यह महज़ एक तमाशा लग सकता है। लेकिन असल में ये टमाटर नहीं, हज़ारों किसानों की मेहनत और आंसू हैं। बाज़ार में फिलहाल टमाटर 35 से 50 रुपये किलो तक बिक रहा है, जो ग्राहक चुकाते हैं। मगर जो किसान इसे उगाता है, उसे मुश्किल से 8 से 14 रुपये प्रति किलो ही मिल पाता है।
परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। भारत से आने वाले टमाटर की वजह से नेपाली किसानों का माल बाज़ार में बिक ही नहीं पा रहा। यही वजह है कि गुस्साए किसानों ने माइतीघर की सड़क पर टमाटर फेंककर अपना विरोध दर्ज कराया।
करार कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार
सिंहदरबार के अंतर्गत आने वाले 18 मंत्रालयों में सालों से काम कर रहे करार कर्मचारियों को अब सरकार आउटसोर्सिंग के ज़रिए हटाने की तैयारी में है। इसी फैसले के विरोध में कर्मचारी अर्थ मंत्रालय के मुख्य गेट के सामने धरना दे रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि अगर यह योजना लागू हुई तो सालों से काम कर रहे हज़ारों लोगों की नौकरी किसी भी दिन जा सकती है। उनकी मांग साफ है — सरकार आउटसोर्सिंग की योजना तुरंत वापस ले और मौजूदा करार कर्मचारियों की नौकरी की गारंटी दे। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी भी उन्होंने दी है।
तीन दिन से गेट पर अकेली बैठी महिला
इसी बीच बिनु यादव नाम की महिला भी चर्चा में हैं, जो पिछले तीन दिनों से सिंहदरबार के गेट पर धरना दे रही हैं। घरेलू हिंसा की शिकार बताई जा रहीं बिनु गृह मंत्री से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंची थीं। उनके पास मिलने का पास भी था, लेकिन आरोप है कि उन्हें फिर भी भीतर जाने नहीं दिया गया। तब से वह गेट पर ही डटी हुई हैं।
छात्र संगठन का प्रदर्शन, कई गिरफ्तार
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) से जुड़े छात्र संगठन अनेरास्ववियु ने सिंहदरबार के दक्षिणी गेट के सामने प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि देश में राजकीय दमन बढ़ रहा है, कानून का राज कमज़ोर हो रहा है और गरीबों की आवाज़ को दबाया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सड़क के बीचोंबीच मोटरसाइकिलें आड़ी खड़ी कर दीं और नारेबाज़ी शुरू कर दी। इससे कुछ देर के लिए इलाके में यातायात भी प्रभावित रहा। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों और मोटरसाइकिलों को सड़क से हटवाया।
पुलिस ने संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष दीपक धामी समेत छह लोगों को हिरासत में ले लिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।
जनकपुर से पैदल न्याय मार्च
सूदखोरी यानी मीटर-ब्याज के जाल में फंसे पीड़ितों ने भी अपनी लड़ाई तेज़ कर दी है। जनकपुरधाम के तिरहुतिया गाछी से शुरू हुआ उनका पैदल “न्याय मार्च” अब काठमांडू की ओर बढ़ रहा है। पीड़ितों का कहना है कि पहले भी कई बार आंदोलन हुए और सरकार से समझौते भी हुए, लेकिन इंसाफ अब तक नहीं मिला — इसीलिए उन्हें फिर सड़क पर उतरना पड़ा।
उनकी प्रमुख मांगें इस तरह हैं:
- मीटर-ब्याज से जुड़े फर्ज़ी दस्तावेज़, नकली गिरवीनामे, फर्ज़ी रजिस्ट्रेशन और चेक रद्द किए जाएं
- ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए अलग विशेष न्यायाधिकरण बने
- पीड़ितों पर लगाए गए झूठे मुकदमों की दोबारा जांच हो
- सूदखोरों की अवैध कमाई और संपत्ति की जांच हो
- पीड़ितों की छीनी गई ज़मीन-जायदाद वापस दिलाई जाए और उचित मुआवज़ा दिया जाए
इन मांगों को लेकर गृह मंत्री सुदन गुरुंग बारा पहुंचे हैं, जहां सरकार और पीड़ितों के बीच बातचीत चल रही है। जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की पहली मांग सरकार पहले ही पूरी कर चुकी है।
संसद में विपक्ष का दो महीने से हंगामा
सड़क के अलावा संसद के भीतर भी माहौल गरम है। बीते दो महीने से विपक्षी दल लगातार विरोध जता रहे हैं। असल विवाद प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेपाल ने भी भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा किया हुआ है। विपक्ष की मांग है कि यह बयान संसद के रिकॉर्ड से हटाया जाए, और इसी मुद्दे पर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा।