जलने के बाद इलाज के लिए अब मरीजों को चुनिंदा अस्पतालों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मंत्रालय ने सातों प्रदेश में जलन उपचार की सेवा बढ़ाने और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू की है।
इसके साथ ही अस्पतालों में मिलने वाली मनोसामाजिक परामर्श सेवा को भी मरीजों और उनके परिवारों के लिए आसान बनाया जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि इलाज के दौरान मानसिक और भावनात्मक सहयोग की जरूरत को अब अलग नहीं रखा जा सकता।
हर प्रदेश की जरूरत का बनेगा अलग खाका
स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मंत्री निशा मेहता के निर्देश पर हाल ही में नियुक्त स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानों के उपकुलपतियों के साथ वर्चुअल बैठक हुई। इसमें देशभर में चल रही जलन उपचार सेवाओं की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई।
बैठक में प्रतिष्ठानों ने अपने यहां उपलब्ध डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों, उपचार कक्ष, उपकरण, दवाओं और जरूरी संसाधनों की जानकारी दी। सेवा चलाने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर भी खुलकर चर्चा हुई।
अब प्रत्येक प्रदेश में जलन उपचार के लिए जरूरी विशेषज्ञ जनशक्ति, प्रशिक्षण, उपचार कक्ष, उपकरण, दवा और अन्य संसाधनों का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
सभी प्रदेशों की स्थिति एक जैसी नहीं है। इसलिए एक ही योजना पूरे देश पर लागू करने के बजाय स्थानीय जरूरत के हिसाब से अलग कार्ययोजना बनाई जाएगी। बैठक में इसी आधार पर काम आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है।
मरीज और परिवार को मिलेगा मानसिक सहारा
जलन के मरीजों का इलाज केवल शारीरिक घाव तक सीमित नहीं होता। लंबे इलाज, दर्द, चेहरे या शरीर पर पड़े निशान और रोजमर्रा की जिंदगी में आए बदलाव का असर मरीज के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। परिवार भी इस मुश्किल दौर से गुजरता है।
इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानों में चल रहे मनोसामाजिक परामर्श केंद्रों को ज्यादा सेवामुखी बनाने का फैसला किया गया है।
प्रतिष्ठानों को निर्देश दिया गया है कि अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिवारों को परामर्श सेवा के बारे में साफ जानकारी दी जाए। जरूरतमंद व्यक्ति को केंद्र तक पहुंचने में अनावश्यक परेशानी न हो, इसकी व्यवस्था भी अस्पताल स्तर पर करनी होगी।
अभी कई जगह परामर्श सेवा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती। मंत्रालय इस दूरी को कम करना चाहता है।
सेवा विस्तार के काम में तेजी लाने के निर्देश
मंत्री निशा मेहता ने जलन उपचार और मानसिक स्वास्थ्य सेवा, दोनों की पहुंच और गुणवत्ता सुधारने को प्राथमिकता बताया है।
उनका कहना है कि सातों प्रदेश में सेवा विस्तार के लिए स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और संबंधित निकायों के बीच जरूरी समन्वय बढ़ाया जाएगा। संसाधनों की पहचान के बाद कार्यान्वयन की प्रक्रिया को भी तेज किया जाएगा।
प्रदेश स्तर पर प्रभावी सेवा शुरू होने से गंभीर जलन के मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी कम हो सकती है। समय पर उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी और परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक तथा मानसिक दबाव भी घटेगा।