नेपाल को गाभी से 5.76 करोड़ डॉलर के टीके और अनुदान का प्रस्ताव
नेपाल के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम को आने वाले वर्षों में कैसे मजबूत और आर्थिक रूप से टिकाऊ रखा जाए, इसे लेकर सरकार और गाभी, द वैक्सीन एलायंस के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। चर्चा का केंद्र 2027 से 2030 तक की साझेदारी रही, जिसमें गाभी की मदद के साथ नेपाल की अपनी हिस्सेदारी भी बढ़ाने का प्रस्ताव है।
स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मंत्री निशा मेहता ने नेपाल के लिए गाभी की वरिष्ठ मैनेजर निल्गुन आयदोगान के नेतृत्व वाली टीम के साथ इस मुद्दे पर बैठक की। इसमें अगले चार साल के लिए जरूरी टीकों, नकद सहायता और सरकार की सह-वित्तीय जिम्मेदारी पर विस्तार से बात हुई।
चार साल में करीब 4 करोड़ डॉलर के टीकों का प्रस्ताव
प्रस्ताव के मुताबिक गाभी 2027 से 2030 के बीच नेपाल को 3 करोड़ 96 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के टीके उपलब्ध करा सकता है। इसके अलावा 1 करोड़ 80 लाख 60 हजार डॉलर की नकद सहायता का प्रस्ताव भी रखा गया है।
लेकिन इस बार पूरी तस्वीर सिर्फ बाहरी मदद की नहीं है।
नेपाल सरकार को भी करीब 1 करोड़ 71 लाख अमेरिकी डॉलर का सह-वित्तीय निवेश करना होगा। यानी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम को चलाने में आने वाले वर्षों में सरकारी बजट की भूमिका और बढ़ेगी।
यही इस बातचीत का अहम हिस्सा है। दुनिया भर में विकास सहायता और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में लंबे समय से बाहरी सहयोग के साथ चल रहे नेपाल के टीकाकरण कार्यक्रम को भविष्य में अपने संसाधनों के दम पर कैसे टिकाया जाए, यह सवाल अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
25 साल पुरानी है नेपाल और गाभी की साझेदारी
नेपाल और गाभी के बीच टीकाकरण के क्षेत्र में साझेदारी 2001 में शुरू हुई थी। इस सहयोग को अब 25 साल पूरे हो चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस अवधि में नेपाल को गाभी से 55 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा मूल्य की सहायता मिल चुकी है।
इस रकम का इस्तेमाल केवल टीके खरीदने में नहीं हुआ। टीकों को सुरक्षित तापमान पर रखने के लिए जरूरी कोल्ड चेन नेटवर्क के निर्माण और विस्तार से लेकर स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने तक कई क्षेत्रों में गाभी का निवेश रहा है।
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में अभी सरकार 11 तरह के टीके उपलब्ध करा रही है। इनमें पांच टीकों में गाभी की सह-वित्तीय भागीदारी है, जबकि एक टीका गाभी की ओर से मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है।
परिवार कल्याण महाशाखा के तहत चलने वाले नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अलावा समय-समय पर होने वाले विशेष टीकाकरण अभियानों में भी गाभी सहयोग करता रहा है।
अब चुनौती सिर्फ टीके जुटाने की नहीं
अगले चार साल की प्रस्तावित साझेदारी को इसी वजह से एक बदलाव के दौर के रूप में देखा जा रहा है। सवाल केवल यह नहीं है कि नेपाल को जरूरी टीके लगातार मिलते रहें। सरकार को धीरे-धीरे अपनी वित्तीय जिम्मेदारी भी बढ़ानी होगी, ताकि बाहरी सहायता कम होने पर कार्यक्रम प्रभावित न हो।
बैठक में बदलती वैश्विक आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास और स्वास्थ्य सहायता के लिए उपलब्ध रकम घटने की स्थिति में नेपाल जैसे देशों के लिए अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की लंबी अवधि की फंडिंग सुनिश्चित करना जरूरी होता जा रहा है।
गाभी की टीम ने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में नेपाल की प्रगति और मंत्री मेहता के नेतृत्व की सराहना की। प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में नेपाल के साथ सहयोग जारी रखने की उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।
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