चीन की चेतावनी: बैरियर झील टूटने का खतरा, नेपाल अलर्ट पर
पिछली बाढ़ से उजड़े कई इलाके अभी संभल भी नहीं पाए हैं और भोटेकोसी, त्रिशूली और नारायणी नदी के आसपास फिर बड़े बहाव का खतरा बताया जा रहा है। तिब्बत में पहिरो के बाद नदी का पानी रुकने से एक बड़ी अस्थायी झील बनने की जानकारी सामने आई है। प्राकृतिक रुकावट टूटी तो पानी तेजी से नेपाल की ओर आ सकता है।
इसी आशंका के बीच नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है। खासकर उन परिवारों के लिए चिंता ज्यादा है, जो पिछली बाढ़ के बाद अपने घरों में लौट चुके हैं।
स्रोत सामग्री के मुताबिक चीन की ओर से नेपाल को उच्च सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। हालांकि संभावित बाढ़ के समय और झील में जमा पानी की मात्रा को लेकर अभी कोई औपचारिक सरकारी सूचना या वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई है। इसलिए इन आंकड़ों को पक्के पूर्वानुमान के बजाय संभावित खतरे की जानकारी के तौर पर देखना जरूरी है।
तिब्बत में बनी झील को लेकर क्या जानकारी है?
उपलब्ध विवरण में कहा गया है कि पहिरो से नदी का बहाव रुकने के बाद बनी झील में करीब 2 अरब लीटर पानी जमा हो चुका है। अगले चार दिनों में इसमें करीब 3 अरब लीटर और पानी पहुंचने का अनुमान दिया गया है।
इस हिसाब से भदौ 16 तक झील में पानी की मात्रा करीब 5 अरब लीटर तक पहुंचने की बात कही गई है।
लेकिन इन आंकड़ों के साथ किसी संबंधित सरकारी एजेंसी, वैज्ञानिक संस्था या जिम्मेदार अधिकारी का प्रत्यक्ष बयान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इतना ही पानी जमा होगा या किसी तय समय पर प्राकृतिक बांध टूट जाएगा।
खतरा फिर भी गंभीर है। पहिरो से बनी ऐसी झील का अवरोध अचानक टूटने की स्थिति में नीचे की ओर तेज बहाव आ सकता है। इसी वजह से समय रहते सावधानी बरतने पर जोर दिया जा रहा है।
पिछली बाढ़ का मलबा बढ़ा सकता है नुकसान
इस बार चिंता सिर्फ पानी को लेकर नहीं है। पिछली बाढ़ नदी के रास्ते में बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर, लकड़ी और दूसरा मलबा छोड़ गई है।
अगर दोबारा तेज बहाव आता है तो पानी इस सामग्री को भी अपने साथ नीचे ला सकता है। इससे नदी किनारे की बस्तियों, पुलों, सड़कों और निचले इलाकों पर असर बढ़ने का खतरा है।
रसुवा के भोटेकोसी क्षेत्र से लेकर त्रिशूली और आगे नारायणी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को इस दौरान नदी के बहुत करीब न जाने की सलाह दी गई है। बहकर आए सामान को निकालने या नदी की स्थिति देखने के लिए किनारे तक जाना भी जोखिम भरा हो सकता है।
पिछली बाढ़ में कोई घर या बस्ती बच गई थी, इसका मतलब यह नहीं कि अगला तेज बहाव भी उसी रास्ते से गुजरेगा या वहां नुकसान नहीं होगा। स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा निकाय और आपदा प्रबंधन से जुड़े आधिकारिक निर्देशों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में 469 शव मिलने का विवरण
इसी बीच पिछली बाढ़ से हुए मानवीय नुकसान की तस्वीर बेहद गंभीर बनी हुई है। उपलब्ध पछिल्लो विवरण में अलग-अलग जिलों से कुल 469 शव मिलने का उल्लेख है।
इनमें चितवन में 178 और नवलपरासी पूर्व में 110 शव मिलने की जानकारी दी गई है। गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धादिङ में 33, तनहुँ में 28, नवलपरासी पश्चिम में 27 और रसुवा में 12 शव मिलने का विवरण है।
इसके अलावा 28 पुलिसकर्मी अब भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं।
खोज और बचाव का काम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई प्रभावित जगहों पर अभी भी राहत और तलाश की जरूरत बनी हुई है।
1,545 लोगों का बचाव, 84 का अस्पताल में इलाज
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक 1,545 लोगों को बचाया गया है। इनमें सबसे ज्यादा 898 लोगों को नुवाकोट से और 644 लोगों को रसुवा से निकाला गया। धादिङ से तीन लोगों के बचाव की जानकारी है।
बचाए गए लोगों में 84 का काठमांडू घाटी के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चलने का विवरण भी सामने आया है। कुछ लोग उपचार के बाद घर लौट चुके हैं।
अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में भी बड़ा बचाव अभियान चलाया गया। परियोजना की सुरंग में दो दिनों से फंसे 350 लोगों को नेपाली सेना ने बुधवार शाम सुरक्षित बाहर निकाला।
अभी नदी किनारे जाने से बचने की जरूरत
इतने बड़े मानवीय नुकसान के बीच नई बाढ़ की आशंका को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। भोटेकोसी, त्रिशूली और नारायणी के तटीय इलाकों के साथ उन बस्तियों को खास सावधानी रखने की जरूरत है, जहां पिछली बाढ़ का असर पड़ा था।
सोशल मीडिया पर आने वाली हर सूचना को सही मानकर घबराने की भी जरूरत नहीं है। खासकर पानी की मात्रा, प्राकृतिक बांध टूटने के समय या बाढ़ पहुंचने के निश्चित समय से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
फिलहाल सबसे सुरक्षित रास्ता यही है कि नदी और जोखिम वाले निचले इलाकों से दूरी रखी जाए। स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा निकाय और आपदा प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार सरकारी निकाय जो सूचना जारी करें, उसी के आधार पर सुरक्षित स्थान पर जाने या दूसरी सावधानियां अपनाने का फैसला किया जाए।
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