‘ग्रे जोन’ रिपोर्ट में जिनके नाम, वे जवाब दें: महेश बस्नेत

Hindi News Desk
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‘ग्रे जोन’ रिपोर्ट में जिनके नाम, वे जवाब दें: महेश बस्नेत

काठमांडू में अमेरिकी ऑनलाइन प्रकाशन ‘द ग्रे जोन’ की एक रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। नेकपा एमाले के सचिव महेश बस्नेत ने कहा है कि रिपोर्ट में जिन नेपाली राजनीतिक नेताओं के नाम आए हैं, उन्हें सामने आकर स्थिति साफ करनी चाहिए। अगर रिपोर्ट में किए गए दावे गलत हैं तो उनका जवाब तथ्यों के साथ दिया जाना चाहिए।

बस्नेत ने रविवार को च्यासल स्थित एमाले केंद्रीय कार्यालय में चुनाव समीक्षा और पुनर्गठन कार्यदल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सभापति रवि लामिछाने और गृहमंत्री सुदन गुरुङ का नाम लेते हुए कहा कि रिपोर्ट में उठे सवालों पर संबंधित लोगों की स्पष्ट प्रतिक्रिया जरूरी है।

‘द ग्रे जोन’ ने 9 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में कथित लीक दस्तावेजों के आधार पर शाह, लामिछाने, गुरुङ और सांसद सागर ढकाल को अमेरिका समर्थित राजनीतिक और नागरिक नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रमों से जोड़ा है। रिपोर्ट में इन कार्यक्रमों और नेपाल में बाद में उभरे राजनीतिक नेतृत्व के बीच संबंध होने का दावा किया गया है।

हालांकि, किसी अमेरिकी सहायता वाले कार्यक्रम के दस्तावेज में किसी नेता का नाम होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति किसी विदेशी सरकार के निर्देश पर काम कर रहा था। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से ऐसे सीधे नियंत्रण या निर्देश का निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसी वजह से रिपोर्ट के व्यापक राजनीतिक निष्कर्षों को लेकर नेपाल में सवाल और बहस दोनों जारी हैं।

भरत दाहाल की गिरफ्तारी पर भी उठाया सवाल

बस्नेत ने राजनीतिक विश्लेषक भरत दाहाल की गिरफ्तारी को भी इसी विवाद के संदर्भ में उठाया। दाहाल को रविवार को मोरङ से हिरासत में लेकर काठमांडू लाया गया। पुलिस के मुताबिक काठमांडू में जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर उन्हें पकड़ा गया है।

बस्नेत ने सवाल किया कि एक तरफ विदेशी प्रभाव और राजनीतिक संबंधों को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है, दूसरी तरफ इस विषय पर बोलने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई को किस तरह देखा जाए। उन्होंने दाहाल की गिरफ्तारी और मौजूदा विवाद के बीच संबंध होने का सवाल उठाया, हालांकि यह बस्नेत का राजनीतिक सवाल है; दोनों के बीच सीधा संबंध स्थापित होने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

राजनीतिक घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग

एमाले सचिव ने नेपाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और राज्य की महत्वपूर्ण संरचनाओं को हुए नुकसान की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

उनका कहना था कि जांच में किसी विदेशी शक्ति की भूमिका या संलिप्तता के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। विदेशी शक्तियों की भूमिका को लेकर बस्नेत की यह बात आरोप और जांच की मांग के रूप में है, इसे स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

‘द ग्रे जोन’ की रिपोर्ट ने भी नेपाल के हालिया राजनीतिक बदलावों को अमेरिकी सहायता से चलने वाले पुराने कार्यक्रमों से जोड़कर देखा है। रिपोर्ट में CEPPS से जुड़े दस्तावेजों का हवाला दिया गया है। दूसरी ओर, उपलब्ध सामग्री से यह निर्णायक रूप से साबित नहीं होता कि इन्हीं कार्यक्रमों के कारण नेपाल का बाद का राजनीतिक बदलाव हुआ या मौजूदा नेता सत्ता तक पहुंचे।

संविधान संशोधन पर एमाले की सीमा साफ

बस्नेत ने संविधान संशोधन को लेकर चल रही चर्चा पर भी पार्टी का रुख रखा। उनके मुताबिक संघीय व्यवस्था को कम खर्चीला और ज्यादा असरदार बनाने के तरीकों पर बातचीत की जा सकती है, लेकिन गणतंत्र, संघीयता और समावेशी प्रतिनिधित्व को कमजोर करने वाले बदलाव एमाले को स्वीकार नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि महिलाओं, दलितों, आदिवासी जनजातियों और मधेसी समेत विभिन्न समुदायों को संविधान से मिला प्रतिनिधित्व बना रहना चाहिए।

राजतंत्र की वापसी और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था हटाने की मांग पर भी उन्होंने एमाले की असहमति दोहराई। बस्नेत के मुताबिक मौजूदा राजनीतिक माहौल में संविधान संशोधन की बहस किस दिशा में जाती है, इसे लेकर पार्टी सतर्क और सशंकित है।

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