कानून मंत्री सोविता गौतम की पहल पर आयोग कानून में संशोधन

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कानून मंत्री सोविता गौतम की पहल पर आयोग कानून में संशोधन

नेपाल सरकार ने नेपाल कानून आयोग अधिनियम, 2063 में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार सरकार ने मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले आम लोगों, कानूनी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अन्य संबंधित पक्षों से सीधे सुझाव मांगे हैं। कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय ने इच्छुक लोगों से सात दिन के भीतर अपनी राय भेजने की अपील की है।

मंत्रालय का कहना है कि कानून बनाने की प्रक्रिया को अधिक सहभागी, व्यावहारिक और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। नागरिक मंत्रालय के सुझाव पोर्टल के जरिए अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद जरूरी बदलाव शामिल करते हुए विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा।

कानून आयोग की भूमिका बढ़ाने की तैयारी

कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों की मंत्री सोविता गौतम ने संकेत दिया है कि सरकारी विधेयकों की तैयारी की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। अभी कई मसौदे बाहरी परामर्शदाताओं या अन्य संस्थाओं की मदद से तैयार किए जाते हैं, लेकिन आगे सरकार चाहती है कि ऐसे विधेयक नेपाल कानून आयोग ही तैयार करे।

मंत्रालय के अनुसार, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आयोग की संस्थागत क्षमता और उसकी भूमिका को मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

कानून निर्माण में जनता की भागीदारी पर जोर

पिछले कुछ वर्षों से मंत्रालय विभिन्न कानूनी मसौदों पर नागरिकों की राय लेने की प्रक्रिया अपनाता रहा है। उसका मानना है कि इससे कानून निर्माण अधिक पारदर्शी होगा और लोगों में उसके प्रति भरोसा और अपनापन भी बढ़ेगा। साथ ही ऐसे कानून बनाने में मदद मिलेगी जिन्हें व्यवहार में लागू करना आसान हो।

2083/84 को बनाया गया ‘कानून सुधार वर्ष’

मंत्रालय ने आर्थिक वर्ष 2083/84 को ‘कानून सुधार तथा कानून निर्माण वर्ष (Law Reform Year)’ घोषित किया है। इस अभियान के तहत तैयार किए जाने वाले 166 विधेयकों की सूची संघीय संसद को सौंप दी गई है।

सरकार का कहना है कि कानून निर्माण की प्रक्रिया को समयबद्ध, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी नीतिगत और संस्थागत सुधार भी साथ-साथ आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

आगे क्या होगी प्रक्रिया

जनता से मिले सुझावों को शामिल करने के बाद संशोधन विधेयक को वित्त मंत्रालय की राय के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिलने पर विधेयक संघीय संसद में पंजीकृत होगा। संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संशोधित कानून लागू किया जाएगा।

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