रसुवा बाढ़ में 16 की मौत, भारत में भी बढ़ा खतरा
नेपाल के रसुवा में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत में भी चिंता बढ़ गई है। गंडक और नारायणी नदी में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश ने सीमावर्ती और नदी किनारे के इलाकों में प्रशासन को सतर्क कर दिया है। खास तौर पर उन जिलों पर नजर रखी जा रही है, जहां नेपाल से आने वाले पानी का असर पड़ सकता है।
बुधवार को रसुवा में आई बाढ़ में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है। बड़ी संख्या में नेपाली और विदेशी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। बस्तियों, सड़कों और दूसरे बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव का काम जारी है।
नेपाल में हालात अभी पूरी तरह साफ नहीं हुए हैं। इसी बीच भारत की चिंता नदियों के निचले बहाव वाले इलाकों को लेकर है। पानी का दबाव बढ़ने की स्थिति में बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों पर इसका असर पड़ सकता है।
बिहार में स्वास्थ्य और आपदा तंत्र अलर्ट
बिहार सरकार ने नेपाल के हालात पर उच्च स्तर से नजर रखनी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक मुख्य सचिव और पुलिस महानिरीक्षक समेत वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की जानकारी ले रहे हैं और संभावित खतरे का आकलन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की है। जरूरत पड़ने पर वह प्रभावित होने की आशंका वाले इलाकों का दौरा भी कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग को भी तैयार रहने को कहा गया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के मुताबिक जोखिम वाले इलाकों में जरूरत पड़ते ही मदद पहुंचाई जा सके, इसके लिए विभागीय स्तर पर तैयारी और तालमेल की समीक्षा की जा रही है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों से सिर्फ पानी का स्तर देखने के लिए नदी के पास नहीं जाने को कहा गया है। प्रशासन ने अफवाहों से बचने और आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करने की सलाह भी दी है।
महाराजगंज और कुशीनगर पर खास नजर
उत्तर प्रदेश में नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में भी प्रशासन सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजगंज और कुशीनगर जिलों को हाई अलर्ट पर रखने की जानकारी दी है।
गंडक और नारायणी में जलस्तर बढ़ने की आशंका के बीच स्थानीय प्रशासन को पहले से तैयारी पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं। नदी किनारे के इलाकों की निगरानी के साथ बचाव दल और जरूरी संसाधनों को तैयार रखने को कहा गया है।
नेपाल में आई इस बाढ़ का स्रोत चीन के तिब्बती क्षेत्र की ओर बताया जा रहा है। अचानक आए तेज बहाव ने रसुवा और आसपास के प्रभावित हिस्सों में बस्तियों और दूसरे ढांचों को नुकसान पहुंचाया है।
384 यात्रियों से संपर्क नहीं, 105 भारतीय
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से कम से कम 384 यात्रियों का संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली हैं।
विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय भी शामिल बताए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के संपर्क से बाहर होने के कारण नेपाल में खोज और बचाव अभियान बड़ी चुनौती बना हुआ है।
फिलहाल नेपाल में जान-माल के नुकसान का पूरा आंकड़ा जुटाया जा रहा है और लापता लोगों की तलाश जारी है। भारत में प्रशासन की प्राथमिकता नदी के निचले हिस्सों में किसी संभावित खतरे से पहले तैयारी रखने की है। इसी वजह से बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती तथा नदी किनारे के जिलों में निगरानी बढ़ाई गई है।
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