पूर्व IGP ओमविक्रम राणा की पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

Hindi News Desk
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पूर्व IGP ओमविक्रम राणा की पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

नेपाल पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक ओमविक्रम राणा की पेंशन रोकने से जुड़ा मामला फिर सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त पीठ में पहुंच गया है। सूडान घोटाला मामले में भ्रष्टाचार के दोषी ठहराए जा चुके राणा ने पेंशन रोकने के फैसले को अलग से चुनौती दी है। उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए न्यायाधीश नृपध्वज निरौला और मेघराज पोखरेल की संयुक्त पीठ में पेशी तय हुई है।

राणा का कहना है कि भ्रष्टाचार मामले में उन्हें मिली सजा अपनी जगह है, लेकिन उसी फैसले के आधार पर उनकी पेंशन रोकने के लिए किया गया पत्राचार कानूनी रूप से उचित नहीं है। इसी सवाल पर अब सुप्रीम कोर्ट में विवाद चल रहा है।

अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग के पत्र के बाद निवृत्तिभरण व्यवस्थापन कार्यालय ने राणा की पेंशन रोक दी थी। इसके खिलाफ उन्होंने 18 साउन 2081 को सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की थी।

मामला विचाराधीन रहने के दौरान न्यायाधीश कुमार चुडाल और अब्दुल अजिज मुसलमान की संयुक्त पीठ ने राणा को अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने अख्तियार के उस पत्र को तत्काल लागू नहीं करने का अंतरिम आदेश दिया था, जिसके आधार पर पेंशन रोकी गई थी।

भ्रष्टाचार की सजा से अलग है पेंशन का सवाल

मौजूदा कानूनी विवाद सूडान घोटाले में राणा दोषी हैं या नहीं, इस पर नहीं है। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही अंतिम फैसला दे चुका है। अब सवाल यह है कि भ्रष्टाचार में दोषी ठहराए जाने के बाद पूर्व पुलिस महानिरीक्षक को मिल रही पेंशन रोकी जा सकती है या नहीं और इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया कानून के मुताबिक थी या नहीं।

अख्तियार ने सूडान घोटाले में हुए फैसले को आधार बनाकर निवृत्तिभरण व्यवस्थापन कार्यालय को राणा की पेंशन उपलब्ध न कराने के लिए पत्र भेजा था। कार्यालय ने उसी के बाद भुगतान रोक दिया।

राणा ने इसी कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। पहले जारी अंतरिम आदेश से अख्तियार के पत्र के अमल पर रोक लगी थी। अब संयुक्त पीठ में होने वाली सुनवाई इस विवाद की आगे की कानूनी दिशा तय करेगी।

सूडान मिशन की खरीद में सामने आया था घोटाला

यह मामला नेपाल पुलिस के संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए सूडान भेजे जाने वाले पुलिसकर्मियों के लिए बंदोबस्ती का सामान खरीदने से जुड़ा था। जिस समय खरीद का समझौता हुआ, उस समय ओमविक्रम राणा नेपाल पुलिस के महानिरीक्षक थे।

खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद केस विशेष अदालत पहुंचा। विशेष अदालत ने 1 चैत 2068 को राणा समेत कुछ पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया था।

राणा को दो साल कैद और 17 करोड़ 6 लाख 824 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। मामले के कुछ आरोपियों को विशेष अदालत से सफाई मिलने के बाद अख्तियार उस हिस्से को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कैद रखी, जुर्माना घटाया

सूडान घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने 17 वैशाख 2074 को अंतिम फैसला सुनाया। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की और न्यायाधीश विश्वम्भरप्रसाद श्रेष्ठ की संयुक्त पीठ ने राणा समेत कुछ पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराने का फैसला कायम रखा था।

राणा की दो साल की कैद की सजा बरकरार रही, लेकिन जुर्माने में बड़ी कटौती की गई। विशेष अदालत ने जहां 17 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया था, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इसे घटाकर 50 हजार रुपये कर दिया।

भ्रष्टाचार मामले की न्यायिक प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। लेकिन उसी सजा के आधार पर राणा की पेंशन रोकना कानूनी रूप से सही है या नहीं, यह सवाल अब अलग मामले के रूप में सुप्रीम कोर्ट के सामने है। मौजूदा रिट की सुनवाई इसी मुद्दे पर केंद्रित है।

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