भोटेकोशी बाढ़ के बाद राहत-पुनर्वास तेज करने की रास्वपा की मांग
भोटेकोशी में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद में किसी तरह की कमी न रहे, इसे लेकर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) ने सरकार का ध्यान खींचा है। पार्टी ने कहा है कि लापता लोगों की स्थिति साफ करने से लेकर राहत, पुनर्वास और घरों के पुनर्निर्माण तक के काम को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए।
रविवार को पार्टी कार्यालय में हुई सचिवालय की बैठक में बाढ़ के बाद चल रहे खोज और बचाव अभियान की समीक्षा की गई। सरकार में शामिल पार्टी के मंत्रियों और पदाधिकारियों से प्रभावित इलाकों में अब तक हुए काम की जानकारी भी ली गई।
पार्टी प्रवक्ता जगदीश खरेल के मुताबिक, बैठक में बताया गया कि खोज, बचाव और राहत के साथ अब पुनर्वास और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है।
पीड़ित परिवारों तक समय पर मदद पहुंचाने पर जोर
रास्वपा का कहना है कि आपदा से प्रभावित लोगों को जमीन पर सरकार की मौजूदगी महसूस होनी चाहिए। राहत वितरण में देरी न हो और जरूरतमंद परिवारों तक जरूरी सहायता सीधे और प्रभावी तरीके से पहुंचे, इसके लिए सरकारी स्तर पर काम तेज करने की जरूरत है।
बैठक में उन शवों का मुद्दा भी उठा, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो सकी है। पार्टी ने डीएनए जांच जल्द पूरी करने और पहचान से जुड़ी प्रक्रिया को लंबा न खींचने की मांग की है।
बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए आने वाला समय भी आसान नहीं है। इसी वजह से पार्टी ने राहत के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तक पीड़ितों की पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया है।
लंबे समय से लापता लोगों का मामला भी उठा
सचिवालय की बैठक में केवल मौजूदा बाढ़ के बाद लापता लोगों पर ही चर्चा नहीं हुई। लंबे समय से लापता लोगों की कानूनी स्थिति का सवाल भी उठाया गया।
रास्वपा के मुताबिक, पांच हजार से अधिक लोग अब भी लापता लोगों की सूची में हैं। पार्टी चाहती है कि ऐसे मामलों में यह स्थिति कानूनी और प्रशासनिक रूप से स्पष्ट की जाए कि संबंधित व्यक्ति जीवित है या उसकी मृत्यु हो चुकी है।
इस प्रक्रिया में मौजूदा कानून बाधा बनता है तो उसमें जरूरी बदलाव करने की बात भी बैठक में रखी गई। पार्टी का कहना है कि ऐसे परिवारों के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल करने का रास्ता खुलना चाहिए, ताकि वे राहत, पुनर्निर्माण और पुनर्वास से जुड़ी प्रक्रियाओं में अटके न रहें।
परिवार की सहमति के आधार पर सरकार को इन मामलों में जरूरी प्रशासनिक सहूलियत देने की मांग भी की गई है।
मधेस अधिवेशन की समस्याओं पर रिपोर्ट
बैठक में पार्टी के अंदरूनी मामलों पर भी चर्चा हुई। मधेस प्रदेश अधिवेशन के दौरान सामने आई समस्याओं की जांच के लिए सहमहामंत्री हरि ढकाल के नेतृत्व में बनी समिति ने अपना ऑडिट रिपोर्ट सचिवालय को सौंप दिया है।
प्रवक्ता खरेल के अनुसार, इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट अगले सप्ताह पेश की जाएगी।
सचिवालय ने पार्टी के अनुशासन आयोग और कुछ विभागों में नए सदस्यों की नियुक्ति का फैसला भी किया। उपसभापति और वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले की भारत यात्रा से जुड़े विषयों और उससे हुई उपलब्धियों की भी बैठक में समीक्षा हुई।
रवि लामिछाने ने कामकाज सुधारने को कहा
बाढ़ के कारण रोक दी गई पार्टी की औपचारिक और नियमित गतिविधियां अब दोबारा शुरू करने का फैसला किया गया है।
बैठक में पार्टी सभापति रवि लामिछाने ने सरकार में शामिल मंत्रियों, निर्वाचित सांसदों और पार्टी नेताओं के काम करने के तरीके तथा आचरण में सुधार की जरूरत बताई।
उन्होंने पार्टी और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने पर भी जोर दिया और संबंधित पदाधिकारियों को इस दिशा में बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।
DISCLAIMER
यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।