सुनसरी में दो समुदायों के बीच झड़प, एक युवक की मौत
नेपाल के सुनसरी जिले में सोमवार देर रात दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की कार्रवाई के दौरान चली गोली से एक युवक की मौत हो गई, जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने देवानगंज और हरिनगर ग्रामीण पालिकाओं में अगले आदेश तक अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है।
बताया गया कि विवाद की शुरुआत सावन के सोमवार पर निकलने वाली बोलबम यात्रा की तैयारी के दौरान हुई। एक समूह डीजे बजाते हुए सप्तकोशी नदी की ओर जाने की तैयारी कर रहा था। इसी बीच दूसरे समुदाय के लोगों ने देर रात तेज आवाज और शोर का विरोध किया। पहले कहासुनी हुई, फिर धक्का-मुक्की शुरू हुई और देखते ही देखते मामला दो समुदायों के बीच हिंसक टकराव में बदल गया।
स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और हवाई फायरिंग की। अधिकारियों का कहना है कि इसके बावजूद भीड़ नहीं रुकी, जिसके बाद गोली चलानी पड़ी।
गोली लगने से 24 वर्षीय ओमप्रकाश मेहता गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें विराटनगर के न्यूरो अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जिला पुलिस कार्यालय सुनसरी के अनुसार उन्हें सशस्त्र पुलिस बल की गोली लगी थी।
कई लोग घायल, सुरक्षाकर्मी भी शामिल
इस घटना में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों को मिलाकर कुल 21 से 22 लोग घायल हुए हैं।
घायलों में मिथलेश यादव (22), अमलेश मेहता (18), मिथलेश मेहता (25) और अमित कुमार यादव (20) का इलाज कोशी अस्पताल में चल रहा है। वहीं रविन्द्र मेहता (21), अमित कुमार यादव (18), सुनील कुमार मेहता (25) और सुनील कुमार मेहता (26) का उपचार विराट नर्सिंग होम में किया जा रहा है।
नेपाल पुलिस के इंस्पेक्टर राकेश राई के सिर में गंभीर चोट आई है। इसके अलावा सब-इंस्पेक्टर गणेशनारायण श्रेष्ठ, वरिष्ठ हवलदार अमरलाल यादव, रामबहादुर राई, विजय यादव, सहायक सब-इंस्पेक्टर नवराज पोखरेल तथा जवान बुद्धदेव साह और निवेश यादव भी घायल हुए हैं। सशस्त्र पुलिस बल के पांच जवानों के घायल होने की भी पुष्टि हुई है।
सांसद ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
सुनसरी से निर्वाचित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद लालबिक्रम थापा ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे सांसद ने आरोप लगाया कि हालात ऐसे नहीं थे कि सीधे गोली चलानी पड़े।
उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में पुलिस अधिकारियों से बातचीत करते हुए कहा कि जवानों ने बिना पर्याप्त समन्वय के गोली चलाई और युवकों के सीने को निशाना बनाया। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ा विवाद
घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि पुलिस की गोली केवल हिंदू युवकों को लगी। इस तरह के दावों के चलते माहौल और संवेदनशील होता दिखाई दे रहा है।
हालांकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। इलाके में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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