त्रिपुरेश्वर बस अग्निकांड: ट्रैफिक विवाद के बाद चालक की मौत

Hindi News Desk
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त्रिपुरेश्वर बस अग्निकांड: ट्रैफिक विवाद के बाद चालक की मौत

काठमांडू के त्रिपुरेश्वर चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस से हुए विवाद के बाद बस चालक अर्जुन दोङ की इलाज के दौरान मौत हो गई। एक हॉर्न बजाने से शुरू हुआ विवाद कुछ ही मिनटों में ऐसी त्रासदी में बदल गया, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है।

घटना के बाद पुलिस ने पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। वहीं चालक की पहचान को लेकर भी नया सवाल खड़ा हो गया है, क्योंकि बस से मिला ड्राइविंग लाइसेंस किसी दूसरे व्यक्ति के नाम का निकला।

रिद्धिसिद्धि यातायात की बा ५ ख ४२७४ नंबर की बस लेकर करीब 25 वर्षीय अर्जुन दोङ रोज की तरह मूलपानी–थानकोट रूट पर निकले थे।

दोपहर करीब 12:30 बजे उनकी बस त्रिपुरेश्वर चौराहे पर पहुंची। सामने चल रही बाइक से रास्ता मांगने के लिए उन्होंने हॉर्न बजाया। उसी समय ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिस ने बस रोक दी और नो हॉर्न जोन में हॉर्न बजाने का आरोप लगाते हुए कागजात मांगे।

यहीं से दोनों के बीच बहस शुरू हुई।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अर्जुन पहले शांत होकर अपनी बात रखते दिखाई देते हैं। बाद में उनका गुस्सा बढ़ता है और वह कहते सुनाई देते हैं कि बिना गलती के उन्हें परेशान किया जा रहा है।

वीडियो में वह यह भी कहते हैं कि उन्होंने कई बार माफी मांगी, लेकिन उन्हें कथित तौर पर “जो करना है कर” जैसी चुनौती दी गई। इसी दौरान उन्होंने अपने बस मालिक को फोन कर कहा कि ट्रैफिक पुलिस के उत्पीड़न से तंग आकर वह कोई अप्रिय कदम उठाने जा रहे हैं।

बस मालिक और यातायात कंपनी के कर्मचारियों ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी।

करीब 12:40 बजे अर्जुन ने बस में बैठे यात्रियों को उतारा और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

थोड़ी देर बाद बस के पिछले हिस्से से आग की लपटें उठने लगीं। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला और तत्काल कीर्तिपुर बर्न अस्पताल पहुंचाया। तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुके थे।

इलाज के दौरान उसी रात उनकी मौत हो गई।

आग बुझाने के लिए दमकल देर से पहुंचने के कारण पूरी बस जल गई।

आग से राहदानी विभाग के बाहर इंटरनेट और बिजली की मुख्य लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे विभाग की सेवाएं कुछ समय के लिए बंद करनी पड़ीं।

घटना की जांच के लिए काठमांडू उपत्यका पुलिस कार्यालय ने एसएसपी रमेश बस्नेत के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति बनाई है।

समिति को पांच दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच में ट्रैफिक पुलिस की भूमिका, पूरे विवाद की परिस्थितियां और आग लगने तक की घटनाओं की पड़ताल की जाएगी।

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने बस से बरामद ड्राइविंग लाइसेंस के आधार पर चालक की पहचान ललितपुर निवासी 25 वर्षीय दावा लामा के रूप में की थी।

लेकिन शाम करीब पांच बजे खुद दावा लामा मीडिया के सामने आए और उन्होंने साफ कहा कि बस में मौजूद व्यक्ति वह नहीं थे।

दावा के अनुसार, वह पहले एक दूसरी यातायात कंपनी में बस चलाते थे और वहीं उनकी पहचान अर्जुन दोङ से हुई थी। उनका कहना है कि कुछ समय पहले उनके लाइसेंस की एक प्रति खो गई थी और संभव है वही प्रति अर्जुन के पास पहुंच गई हो।

इसी दावे के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बस चालक की आधिकारिक पहचान से जुड़ा पूरा मामला कैसे उलझा।

यह घटना सिर्फ एक सड़क विवाद नहीं रही। इसने सार्वजनिक परिवहन चालकों पर बढ़ते दबाव, ट्रैफिक व्यवस्था और कानून लागू करने के तौर-तरीकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।