अमेरिका-ईरान तनाव से उछला कच्चा तेल, बढ़ी वैश्विक चिंता

Hindi News Desk
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अमेरिका-ईरान तनाव से उछला कच्चा तेल, बढ़ी वैश्विक चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में साफ दिखने लगा है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं भी सामने आने लगी हैं।

तनाव की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बिगड़ती सुरक्षा स्थिति है। दुनिया में समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है।

अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि उसने ईरान के खिलाफ हवाई हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि समुद्री व्यापार को निशाना बनाने वाली घटनाएं स्वीकार नहीं की जाएंगी।

इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 5.5 प्रतिशत बढ़कर 75.94 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं अमेरिकी सूचक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। लगातार दूसरे दिन आई तेजी ने बाजार की बेचैनी बढ़ा दी है।

होर्मुज के आसपास विस्फोट के दावे

ईरान के सरकारी मीडिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कई स्थानों पर विस्फोट होने की खबर दी है। केश्म द्वीप, सिरिक और बंदर अब्बास के आसपास धमाकों की आवाज सुनाई देने का दावा किया गया है। बंदर अब्बास ईरान के प्रमुख बंदरगाहों में शामिल है और ऊर्जा कारोबार के लिहाज से अहम माना जाता है।

उधर, कतर ने भी खाड़ी क्षेत्र में तीन व्यावसायिक जहाजों पर हमले का आरोप लगाया है। जानकारी के मुताबिक कतार का एलएनजी टैंकर ‘अल रेकाय्यात’ ड्रोन हमले की चपेट में आया, जिससे उसके इंजन कक्ष में आग लग गई। चालक दल को सुरक्षित बताया गया है और राहत कार्य जारी है।

समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के अनुसार ओमान के तट के पास सऊदी अरब के झंडे वाला एक बड़ा तेल टैंकर भी क्षतिग्रस्त हुआ है। हालांकि नुकसान की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है असर

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल और एलएनजी की ढुलाई महंगी हो सकती है। इससे आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम भी बढ़ेगा।

इसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतें लगातार ऊंची रहने पर आयात बिल बढ़ सकता है। इसका दबाव व्यापार घाटे के साथ-साथ घरेलू ईंधन कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

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