नेपाल ने विदेशी ठेका खत्म किया, अब देश में ही छपेगा राष्ट्रीय पहचान पत्र

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नेपाल सरकार ने राष्ट्रीय पहचान पत्र (नेशनल आईडी कार्ड) की छपाई और उससे जुड़े तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी अब अपने हाथ में लेने का फैसला किया है। अब तक यह काम विदेशी कंपनियों की मदद से किया जा रहा था। नागरिकों का बायोमेट्रिक डेटा जुटाने से लेकर कार्ड छापने और सिस्टम संचालन तक की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं बाहरी प्रदाताओं के पास थीं।

राष्ट्रीय पहचान पत्र के लिए आवेदन करते समय नागरिकों के फिंगरप्रिंट, आंखों की स्कैनिंग और डिजिटल हस्ताक्षर जैसी संवेदनशील जानकारी ली जाती है। इसी वजह से लंबे समय से यह बहस चल रही थी कि यदि डेटा सुरक्षा मजबूत नहीं हुई तो करोड़ों नेपाली नागरिकों की निजी जानकारी जोखिम में पड़ सकती है।

इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने पहले से दिए गए विदेशी ठेकों को समाप्त कर राष्ट्रीय पहचान पत्र प्रणाली को स्वदेशी ढंग से संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 2 करोड़ से अधिक नागरिकों का बायोमेट्रिक डेटा संग्रह किया जा चुका है, जबकि 1 करोड़ से ज्यादा पहचान पत्र छापे जा चुके हैं।

अब सबसे बड़ी चुनौती तकनीक और सुरक्षा की

सरकार का निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ कई नई जिम्मेदारियां भी जुड़ गई हैं। राष्ट्रीय पहचान पत्र में स्मार्ट चिप आधारित प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जिसके लिए उन्नत तकनीकी ढांचे और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी।

चुनौती सिर्फ कार्ड छापने तक सीमित नहीं है। देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से लेकर आम नागरिक तक का संवेदनशील डेटा एक ही प्रणाली में संग्रहित रहेगा। ऐसे में साइबर हमलों और डेटा चोरी से सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा ढांचा और निरंतर निगरानी के बिना इतनी बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली को सुरक्षित रखना आसान नहीं होगा।

विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

सरकार के इस फैसले से कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सबसे पहले नागरिकों के निजी डेटा पर देश का सीधा नियंत्रण बढ़ेगा और संवेदनशील जानकारी विदेशी कंपनियों तक पहुंचने की आशंका कम होगी।

दूसरा बड़ा फायदा आर्थिक है। अब तक पहचान पत्र छपाई, सॉफ्टवेयर संचालन और डेटा प्रबंधन के लिए बड़ी रकम विदेश भेजी जाती रही है। सरकारी जानकारी के अनुसार प्रणाली की स्थापना, सॉफ्टवेयर खरीद और शुरुआती 1 करोड़ 20 लाख स्मार्ट कार्ड छपाई के लिए फ्रांसीसी कंपनी IDEMIA समेत विदेशी सेवा प्रदाताओं को लगभग 5 से 6 अरब नेपाली रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

प्रति कार्ड करीब 2 यूरो यानी 300 रुपये से अधिक खर्च होने के अलावा सॉफ्टवेयर लाइसेंस और रखरखाव पर भी हर साल अतिरिक्त राशि खर्च होती रही है। सरकार का मानना है कि भविष्य में यह काम देश के भीतर होने से बड़ी मात्रा में धन की बचत होगी।

रोजगार और डिजिटल क्षमता बढ़ाने का अवसर

राष्ट्रीय पहचान पत्र प्रणाली को स्वदेशी स्तर पर संचालित करने से नेपाली आईटी क्षेत्र को भी नया अवसर मिल सकता है। डेटा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर विकास और तकनीकी संचालन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय विशेषज्ञों की मांग बढ़ने की संभावना है।

नेपाल में तकनीकी क्षमता रखने वाले युवाओं की कमी नहीं है, लेकिन लंबे समय से उनकी विशेषज्ञता का पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाया है। ऐसे में सरकार का यह कदम डिजिटल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में राष्ट्रीय पहचान पत्र के साथ-साथ पासपोर्ट और अन्य सरकारी दस्तावेजों के प्रबंधन में भी नेपाल विदेशी तकनीकी निर्भरता को कम कर सकता है। इससे देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और घरेलू तकनीकी क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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