नेपाल में पेट्रोल पंप मनमाने ढंग से बंद करने पर सख्त कार्रवाई

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पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत घटने के बाद पेट्रोल पंप बंद कर कृत्रिम कमी पैदा करने की शिकायतों पर अब नेपाल आयल निगम ने सख्त रुख अपनाया है। उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय के निर्देश के बाद निगम ने अपने विनियम में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत नियम तोड़ने वाले पेट्रोल पंपों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और कुछ समय के लिए ईंधन की आपूर्ति भी रोक दी जाएगी।

हाल के दिनों में काठमांडू घाटी समेत कई इलाकों में कीमत कम होने के अगले ही दिन निजी पेट्रोल पंप बंद पाए गए थे। इससे खुले हुए कुछ पंपों पर लंबी कतारें लग गईं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इस घटना के बाद उपभोक्ताओं की नाराजगी लगातार बढ़ी और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी।

नियम तोड़ने पर तीन चरणों में होगी कार्रवाई

नेपाल आयल निगम के संशोधित विनियम के अनुसार, यदि कोई पेट्रोल पंप निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं करता या नियमों के खिलाफ काम करता है, तो उसके खिलाफ क्रमवार कार्रवाई की जाएगी।

  • पहली बार उल्लंघन करने पर 3 लाख नेपाली रुपये का जुर्माना और 5 दिन तक पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बंद रहेगी।
  • दूसरी बार वही गलती दोहराने पर 6 लाख रुपये का जुर्माना और 10 दिन तक आपूर्ति रोक दी जाएगी।
  • तीसरी बार नियम तोड़ने पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और 15 दिन तक ईंधन की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।

इस व्यवस्था के बाद कीमत घटने का बहाना बनाकर पंप बंद करने या कृत्रिम अभाव पैदा करने वाले संचालकों के खिलाफ सीधे कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

मूल्य बढ़ने पर बिक्री, घटने पर बंदी पर रोक की कोशिश

लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि ईंधन महंगा होने पर पेट्रोल पंप बिना किसी परेशानी के बिक्री जारी रखते हैं, लेकिन कीमत घटते ही स्टॉक में नुकसान का हवाला देकर सेवा रोक देते हैं।

हालिया मूल्य समायोजन के बाद भी कई इलाकों में यही स्थिति देखने को मिली। हजारों वाहन चालकों को या तो लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा या फिर समय पर ईंधन नहीं मिल सका।

सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों में इस मामले पर व्यापक चर्चा होने के बाद सरकार ने नियमों में बदलाव कर कड़े दंड का प्रावधान लागू किया है।

अब सबूत के साथ दर्ज कराई जा सकेगी शिकायत

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई पेट्रोल पंप कीमत घटने के बाद जानबूझकर सेवा बंद करता है, कृत्रिम कमी पैदा करता है या किसी अन्य तरीके से नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ संबंधित निकाय में प्रमाण सहित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

ऐसी शिकायतों के आधार पर निगरानी एजेंसियों के लिए कार्रवाई करना पहले की तुलना में आसान माना जा रहा है।

सिर्फ जुर्माना नहीं, मजबूत निगरानी भी जरूरी

हालांकि उपभोक्ताओं का मानना है कि केवल जुर्माने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। नेपाल के पेट्रोलियम क्षेत्र में लंबे समय से निगरानी की कमजोरी और उपभोक्ता शिकायतें सामने आती रही हैं।

समय-समय पर मानक से कम गुणवत्ता वाला ईंधन बेचने, निर्धारित मात्रा से कम ईंधन देने, गुणवत्ता में गड़बड़ी और कुछ मामलों में ईंधन में पानी मिलाने जैसे आरोप भी सामने आते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन समस्याओं पर स्थायी रोक लगाने के लिए नियमित, पारदर्शी और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था जरूरी है।

पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था की जरूरत

खोज समाचार का मानना है कि जुर्माने की व्यवस्था के साथ सरकार को निगरानी तंत्र को भी मजबूत करना चाहिए। इसके लिए कुछ कदम अहम हो सकते हैं।

  • पूरी तरह तकनीक आधारित और स्वचालित निगरानी प्रणाली विकसित की जाए।
  • निरीक्षण टीम किस पेट्रोल पंप पर जाएगी, इसकी जानकारी जांच शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही उपलब्ध हो।
  • हर निरीक्षण का लाइव रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
  • निरीक्षण के बाद सरकारी स्तर पर रेटिंग प्रणाली लागू की जाए।
  • हर पेट्रोल पंप को अपनी सरकारी रेटिंग आम लोगों को साफ दिखाई देने वाली जगह पर प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।

ऐसी व्यवस्था से अधिकारियों और कारोबारियों के बीच संभावित मिलीभगत, पहले से सूचना लीक होने और अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

गुणवत्तापूर्ण ईंधन उपभोक्ताओं का अधिकार

विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन की उम्र, इंजन की कार्यक्षमता और सड़क सुरक्षा पर ईंधन की गुणवत्ता का सीधा असर पड़ता है। इसलिए हर उपभोक्ता को तय मानकों के अनुरूप सही गुणवत्ता और पूरी मात्रा में ईंधन मिलना सरकार की जिम्मेदारी भी है।

नई व्यवस्था का असर तभी दिखेगा जब नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और निगरानी निष्पक्ष, नियमित तथा पारदर्शी तरीके से की जाए। तभी कृत्रिम अभाव पैदा करने जैसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

DISCLAIMER +

यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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