बालेन सरकार के 100 दिन: 24 वादे पूरे, 76 अब भी अधूरे

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नेपाल में नई सरकार के पहले 100 दिनों को उसकी दिशा और कामकाज का शुरुआती पैमाना माना जाता है। इसी दौर को अक्सर सरकार का “हनीमून पीरियड” भी कहा जाता है। बालेन सरकार ने सत्ता संभालते समय पहले 100 दिनों में 100 काम पूरे करने का वादा किया था।

सरकार के 100 दिन पूरे होने के साथ ही उसके कामकाज पर राजनीतिक दलों, मीडिया और आम लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सरकार समर्थक पक्ष उपलब्धियों पर जोर दे रहा है, जबकि आलोचक अधूरे वादों और धीमी प्रगति को सवालों के केंद्र में रख रहे हैं।

खोज समाचार ने सरकार की 100-दिवसीय प्रतिबद्धताओं का उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आकलन किया। समीक्षा में सामने आया कि घोषित 100 प्रतिबद्धताओं में से अब तक 24 पूरी हो चुकी हैं। 8 काम क्रियान्वयन के चरण में हैं, जबकि 68 वादों में अभी तक उल्लेखनीय प्रगति नहीं दिखी है।

इसका मतलब है कि 100 दिनों में पूरे किए जाने वाले 100 वादों में से 76 अभी भी पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सके हैं।

100 दिनों में पूरे हुए 24 प्रमुख काम

  • स्वच्छ, निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने वाली संस्थाओं के प्रति औपचारिक आभार व्यक्त किया गया।
  • परिणाम आधारित प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई।
  • सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों से लागू किए जा सकने वाले बिंदुओं का संकलन कर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता तैयार की गई।
  • संविधान संशोधन पर बहस-पत्र तैयार करने के लिए सात दिनों के भीतर कार्यदल का गठन किया गया।
  • संघीय मंत्रालयों की संख्या 17 रखने के लिए 30 दिनों के भीतर नियमावली में संशोधन किया गया।
  • सरकारी सेवाओं में सुधार के लिए बिजनेस प्रोसेस री-इंजीनियरिंग की शुरुआत की गई।
  • अनुत्पादक बोर्ड, समितियों और संस्थागत ढांचों को खत्म या पुनर्गठित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
  • सार्वजनिक प्रशासन को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करने और दल आधारित ट्रेड यूनियनों को समाप्त करने की पहल की गई।
  • कर्मचारियों की आचार संहिता के प्रभावी पालन पर जोर दिया गया।
  • आरोग्य पर्यटन की रणनीति तैयार की गई।
  • स्नातक स्तर पर प्रवेश के लिए नागरिकता प्रमाणपत्र की अनिवार्यता हटाई गई।
  • नेपाल प्रहरी की सीआईबी को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए कम से कम एक करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए।
  • भंसार में लंबे समय से पड़े वाहनों के प्रबंधन या नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई।
  • सहकारी संस्थाओं के छोटे बचतकर्ताओं की जमा राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
  • कर्मचारी प्रबंधन सूचना प्रणाली का आर्किटेक्चर तैयार किया गया।
  • प्रमुख शहरों में नागरिक सेवा केंद्रों को प्रतिदिन कम से कम 12 घंटे संचालित करने की व्यवस्था की गई।
  • फ्रंट डेस्क कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए सूची तैयार की गई।
  • सरकारी दस्तावेज डाक के जरिए घर तक पहुंचाने की सेवा शुरू की गई।
  • सट्टेबाजी और बेटिंग से जुड़े ऐप और वेबसाइट बंद करने की कार्रवाई शुरू की गई।
  • संपत्ति जांच के लिए अधिकार संपन्न समिति का गठन किया गया।
  • सार्वजनिक खरीद कानून में संशोधन कर डिजिटल खरीद प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
  • रोजगार सेवा केंद्रों को रोजगार, कौशल और उद्यमिता केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल की गई।
  • जेन्जी आंदोलन से प्रभावित व्यवसायों के लिए राहत और पुनर्स्थापना पैकेज लागू किया गया।
  • प्रधानमंत्री कार्य निष्पादन इकाई की स्थापना की गई।

सरकार की शुरुआती 100 दिनों की समीक्षा यह संकेत देती है कि कुछ प्रमुख प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों पर काम हुआ है, लेकिन अधिकांश घोषित प्रतिबद्धताएं अभी पूरी नहीं हो सकी हैं। आने वाले महीनों में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अधूरे वादों को अमल में लाना होगी।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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