लंबे समय से बंद हेटौंडा कपड़ा उद्योग को फिर चलाने की कोशिश अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। सरकार ने नेपाली सेना को दो महीने के भीतर पुराने संयंत्र से कपड़े का परीक्षण उत्पादन शुरू करने की जिम्मेदारी दी है।
उद्योग परिसर में सेना की तकनीकी टीम काम शुरू कर चुकी है। सफाई के साथ मशीनों की मरम्मत चल रही है और शुरुआती उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल भी खरीदा जा चुका है।
सरकार फिलहाल नई मशीनें लगाने या बड़ा निवेश करने के बजाय उद्योग में मौजूद पुराने उपकरणों को ठीक कर उनकी वास्तविक क्षमता जांचना चाहती है। ट्रायल के बाद ही तय होगा कि यह कारखाना लंबे समय तक व्यावसायिक रूप से चल सकता है या नहीं।
मंत्री को सौंपी गई अध्ययन रिपोर्ट
उद्योग को दोबारा चलाने की संभावना, अब तक हुए काम और आगे की योजना पर तैयार रिपोर्ट उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री गौरीकुमारी यादव को सौंप दी गई है।
यह रिपोर्ट मंत्रालय के प्रशासन एवं संस्थान प्रभाग के प्रमुख रामबन्धु सुवेदी की अगुवाई में बनी कार्यदल ने तैयार की है।
कार्यदल ने पहले पुराने संयंत्र से सीमित स्तर पर उत्पादन शुरू करने की सलाह दी है। इससे मशीनों की स्थिति, उत्पादन खर्च, कपड़े की गुणवत्ता और बाजार की संभावना का व्यावहारिक आकलन हो सकेगा।
सरकार की ओर से दी गई समयसीमा के मुताबिक नेपाली सेना को अगले दो महीने के भीतर परीक्षण उत्पादन शुरू करना है।
शुरुआती काम के लिए 33 लाख रुपये
अर्थ मंत्रालय ने असार के पहले सप्ताह में सेना के सैनिक सामग्री उत्पादन निदेशालय के खाते में 33 लाख रुपये जारी किए थे। उद्योग मंत्रालय के प्रस्ताव पर उपलब्ध कराई गई यह रकम मशीनों की मरम्मत, कच्चे माल की खरीद और ट्रायल उत्पादन की तैयारी में खर्च होगी।
सैनिक सामग्री उत्पादन निदेशालय के तकनीकी कर्मचारी इस समय उद्योग की मशीनों को दोबारा चलने लायक बनाने में जुटे हैं।
उद्योग की इमारतें और दूसरी भौतिक संरचनाएं भी वर्षों से इस्तेमाल में नहीं हैं। उनकी मरम्मत के लिए पूर्वाधार विकास मंत्रालय ने 50 लाख रुपये का लागत अनुमान तैयार किया है। निर्माण और संरचनात्मक मरम्मत का काम भी यही मंत्रालय संभालेगा।
उद्योग परिसर की बिजली व्यवस्था की मरम्मत हेटौंडा औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन कार्यालय ने की है। रिपोर्ट के मुताबिक बिजली से जुड़ा काम पूरा हो चुका है।
ट्रायल के बाद बनेगी लंबी योजना
परीक्षण उत्पादन के नतीजे आने के बाद उद्योग के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जाएगी। उसी के आधार पर यह तय होगा कि उद्योग को पूरी क्षमता से चलाने के लिए कितना निवेश चाहिए और उसका प्रबंधन किस स्वरूप में किया जाए।
उत्पादन क्षमता, कानूनी व्यवस्था और जरूरी नीतिगत फैसलों पर भी सरकार बाद में कदम उठाएगी।
रिपोर्ट लेते हुए मंत्री गौरीकुमारी यादव ने हेटौंडा कपड़ा उद्योग को राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी औद्योगिक विरासत बताया। उन्होंने कहा कि तय समय में परीक्षण उत्पादन शुरू कराने के लिए मंत्रालय जरूरी समन्वय और सहयोग करेगा।
हेटौंडा कपड़ा उद्योग को दोबारा चलाने की घोषणाएं पहले भी कई बार हुईं, लेकिन काम जमीन पर आगे नहीं बढ़ सका। इस बार सेना की तकनीकी टीम परिसर में पहुंच चुकी है और सरकार ने शुरुआती बजट भी जारी कर दिया है।
उद्योग चल पड़ा तो सरकारी संस्थानों के लिए जरूरी कपड़े और पोशाक की घरेलू आपूर्ति बढ़ सकती है। बंद पड़ी पुरानी औद्योगिक संरचना भी बचाई जा सकेगी।
लेकिन असली फैसला ट्रायल के बाद ही होगा। पुरानी मशीनें कितना उत्पादन दे पाती हैं, खर्च कितना आता है और तैयार कपड़ा जरूरी गुणवत्ता पर खरा उतरता है या नहीं—इन्हीं नतीजों पर हेटौंडा कपड़ा उद्योग का भविष्य टिका है।