मरीजों की सुरक्षा के लिए नेपाल में आईवीएफ नियमों की तैयारी
नेपाल में आईवीएफ सेवा लेने वाले दंपतियों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ इलाज की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और निजी केंद्रों की जवाबदेही को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। सरकार अब इस पूरे क्षेत्र को साफ नियमों और कानूनी निगरानी के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है।
स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मंत्रालय में शुक्रवार को हुई बैठक में देशभर में चल रहे आईवीएफ केंद्रों की स्थिति की समीक्षा की गई। चर्चा में केंद्रों के पास मौजूद सुविधाओं, प्रशिक्षित जनशक्ति, इलाज के स्तर, अनुमति प्रक्रिया और सरकारी निगरानी पर खास ध्यान दिया गया।
पहले कार्यविधि, बाद में अलग कानून
स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मंत्री निशा मेहता की मौजूदगी में हुई बैठक में फिलहाल आईवीएफ सेवा संचालन के लिए एक स्पष्ट कार्यविधि बनाने पर सहमति बनी। लंबे समय के लिए इस सेवा को अलग कानून के तहत लाने की दिशा में भी तैयारी आगे बढ़ाई जाएगी।
मंत्रालय का मानना है कि केवल अनुमति देकर केंद्र चलाने देना पर्याप्त नहीं है। इलाज कैसे किया जा रहा है, मरीजों को क्या जानकारी दी जा रही है और पूरे उपचार में नैतिक मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच जरूरी है।
आईवीएफ इलाज सीधे प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ा है। इसमें दंपतियों की उम्मीद, निजी जानकारी और बड़ी आर्थिक लागत शामिल होती है। ऐसे में कमजोर व्यवस्था या लापरवाही का असर केवल इलाज पर नहीं, पूरे परिवार पर पड़ सकता है।
मरीजों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
मंत्री मेहता ने कहा कि इलाज के दौरान सेवाग्राही के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। घटिया सेवा और संभावित अनियमितता रोकने के लिए प्रभावी नियमन जरूरी है।
उन्होंने सुरक्षित और जिम्मेदार प्रजनन स्वास्थ्य सेवा की पहुंच बढ़ाने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
बैठक में आईवीएफ केंद्र खोलने के लिए न्यूनतम पूर्वाधार तय करने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, प्रयोगशाला, उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाओं के मानक भी कार्यविधि में शामिल किए जा सकते हैं।
अनुमति और निगरानी की व्यवस्था बदलेगी
मंत्रालय अनुमति प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने और नियमित अनुगमन का स्थायी तंत्र तैयार करने पर काम करेगा। इससे नियम पूरा न करने वाले केंद्रों की पहचान और उन पर कार्रवाई करना आसान होगा।
स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनने के बाद आईवीएफ सेवा देने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। इलाज की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों पर पड़ने वाले संभावित जोखिम को कम करने में भी मदद मिलेगी।
बैठक में डॉ. श्रीप्रसाद अधिकारी, डॉ. ज्योति थापा और डॉ. बिनिता थापा भी शामिल थीं।
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