काठमांडू में गैस संकट: किसी भी कंपनी का सिलेंडर बदल सकेंगे
बाढ़ के बाद एलपी गैस की सप्लाई बिगड़ने से काठमांडू घाटी में लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। कई जगह अपनी कंपनी का सिलेंडर लेकर पहुंच रहे उपभोक्ताओं को उसी कंपनी की गैस नहीं मिल पा रही है। इसे देखते हुए सरकार ने फिलहाल कंपनी बदलकर गैस लेने का रास्ता खोलने का फैसला किया है।
नई व्यवस्था में अगर बाजार में उस कंपनी का गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं है, जिसका सिलेंडर उपभोक्ता के पास है, तो उसे उसी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उपलब्ध दूसरी कंपनी के सिलेंडर से अदला-बदली कर उसी कीमत पर गैस दी जाएगी।
उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री गौरीकुमारी यादव ने नेपाल आयल निगम और संबंधित गैस उद्योगों को काठमांडू घाटी में यह व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है।
अपनी कंपनी की गैस नहीं मिली तो दूसरी कंपनी का सिलेंडर
अब तक आम तौर पर उपभोक्ता जिस कंपनी का सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं, उसी कंपनी की गैस मिलने का इंतजार करते हैं। मौजूदा आपूर्ति संकट में यही स्थिति कई लोगों के लिए मुश्किल बन रही है।
सरकार का कहना है कि ऐसे समय में उपभोक्ता को सिर्फ कंपनी अलग होने के कारण गैस से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसलिए बाजार में जिस कंपनी का भरा हुआ सिलेंडर उपलब्ध होगा, उससे खाली सिलेंडर बदलने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए उपभोक्ता से अलग कीमत नहीं ली जाएगी।
यह व्यवस्था फिलहाल केवल काठमांडू घाटी के लिए लागू की जा रही है।
बाढ़ के बाद बिगड़ी गैस की सप्लाई
हाल की बाढ़ का असर एलपी गैस की आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ा है। काठमांडू घाटी में वितरण पहले की तरह सहज नहीं रहने से कुछ जगह गैस मिलने में दिक्कत शुरू हुई है।
रसोई गैस रोजमर्रा की जरूरत है। ऐसे में सप्लाई में थोड़ी रुकावट भी सीधे घरों पर असर डालती है। सरकार ने इसी दबाव को कम करने के लिए अलग-अलग कंपनियों के सिलेंडर आपस में बदलकर गैस उपलब्ध कराने का विकल्प निकाला है।
मंत्री यादव ने नेपाल आयल निगम और गैस उद्योगों से कहा है कि फैसला सिर्फ निर्देश तक सीमित न रहे। बाजार में उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिलना चाहिए और व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू की जाए।
कृत्रिम कमी पैदा करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी
आपूर्ति में आई परेशानी के बीच सरकार ने गैस की कृत्रिम कमी पैदा करने या मौजूदा स्थिति का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं को परेशान करने वालों को भी चेतावनी दी है।
सरकार की तय व्यवस्था के खिलाफ काम करने वालों पर मौजूदा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। संबंधित निकायों को बाजार की स्थिति पर नजर रखने और उपभोक्ताओं तक गैस की पहुंच बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
फिलहाल सरकार का जोर काठमांडू घाटी में बाढ़ के कारण पैदा हुई तत्काल समस्या को संभालने पर है, ताकि किसी खास कंपनी का सिलेंडर उपलब्ध न होने भर से लोगों की रसोई गैस न रुके।
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