एक दशक से धनुष्टंकार उन्मूलन कायम, नेपाल सम्मानित
माताओं और नवजात शिशुओं को धनुष्टंकार से बचाने की दिशा में नेपाल की दस साल की लगातार सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मातृ और नवजात धनुष्टंकार उन्मूलन की स्थिति एक दशक तक बनाए रखने के लिए नेपाल को सम्मानित किया है।
यह सम्मान टिमोर-लेस्टे के डिली में चल रही डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति की 79वीं बैठक में दिया गया। नेपाल की ओर से अतिरिक्त सचिव डॉ. संगीता कौशल मिश्रा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा ले रहा है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने नेपाली प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख डॉ. मिश्रा को सम्मानपत्र सौंपा।
खोप और सुरक्षित प्रसव ने मजबूत की उपलब्धि
नेपाल के लिए अहम बात सिर्फ मातृ और नवजात धनुष्टंकार का उन्मूलन नहीं, बल्कि इस स्थिति को लगातार दस साल तक बनाए रखना है।
डब्ल्यूएचओ ने इसके पीछे राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिबद्धता, लोगों तक गुणवत्तापूर्ण टीकाकरण सेवाओं की पहुंच और सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था को अहम माना है। यानी यह उपलब्धि लंबे समय से चल रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जमीनी स्तर की सेवाओं से जुड़ी है।
सम्मानपत्र में नेपाल की सफलता को केवल एक देश की उपलब्धि के तौर पर नहीं देखा गया है। इसे पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में मातृ और नवजात धनुष्टंकार उन्मूलन को बनाए रखने की साझा कोशिश से भी जोड़ा गया है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक नेपाल की निरंतरता ने क्षेत्रीय लक्ष्य को बनाए रखने की सामूहिक कोशिश में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
बाढ़ के कारण बैठक में नहीं पहुंचीं स्वास्थ्य मंत्री
इस क्षेत्रीय बैठक में स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मंत्री निशा मेहता खुद डिली नहीं पहुंचीं। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद बने हालात के कारण उन्होंने देश में रहकर स्वास्थ्य प्रतिकार्य और अलग-अलग निकायों के बीच समन्वय को प्राथमिकता दी।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में जीवन बचाने और स्वास्थ्य सेवाओं को संभालने की जरूरत के बीच मंत्री ने बैठक में भौतिक रूप से शामिल नहीं होने का फैसला किया।
हालांकि उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए बैठक को संबोधित किया। इसमें नेपाल में बाढ़ से पैदा हुए संकट और प्रभावित समुदायों की मौजूदा स्थिति को क्षेत्रीय मंच के सामने रखा।
जलवायु संकट के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था की नई चुनौती
मंत्री मेहता ने जलवायु से जुड़ी आपदाओं का स्वास्थ्य पर बढ़ता असर भी उठाया। उनका जोर इस बात पर रहा कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने की चर्चा में जलवायु न्याय को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को जलवायु जोखिमों के लिए तैयार करने के वास्ते पर्याप्त जलवायु वित्त की जरूरत पर भी जोर दिया।
डिली की बैठक में नेपाल के लिए इस बार दो तस्वीरें एक साथ सामने आई हैं। एक तरफ मातृ और नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में दस साल से कायम उपलब्धि को सम्मान मिला है। दूसरी तरफ बाढ़ से पैदा स्वास्थ्य संकट ने यह सवाल भी सामने रखा है कि बदलते जलवायु जोखिमों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था को कितना तैयार और संसाधन-संपन्न बनाया जा सकता है।
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