स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षा कानून संशोधन पर सुझाव देने की अंतिम तारीख आज
स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय ने स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा से जुड़े कानून में संशोधन के लिए तैयार मसौदे पर सुझाव देने की अवधि मंगलवार को पूरी होने की जानकारी दी। मंत्रालय ने सात दिन पहले यह मसौदा सार्वजनिक किया था और आम नागरिकों के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों से राय मांगी थी।
सरकार का कहना है कि अब मिले सुझावों की समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मसौदे में बदलाव करने के बाद इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।
हिंसा रोकने पर जोर
प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों पर बढ़ते हमलों और हिंसा की घटनाओं को लेकर कानून को और मजबूत बनाना है। हाल के वर्षों में इलाज के दौरान विवाद, अस्पतालों में तोड़फोड़ और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं पर असर डाला है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार सख्त कानूनी व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
छात्रों को भी मिलेगा कानूनी संरक्षण
मसौदे में स्वास्थ्य विषयों की पढ़ाई कर रहे छात्रों को भी कानून के संरक्षण के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा हथियार के साथ आपराधिक ताकत का प्रदर्शन करने जैसी गतिविधियों को प्रतिबंधित कृत्यों की सूची में शामिल करने की भी व्यवस्था की गई है।
मंत्रालय को मिलेंगे नए अधिकार
संशोधन प्रस्ताव के अनुसार, स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय को कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देशिका, कार्यविधि और मानक तय करने का अधिकार भी दिया जाएगा। उम्मीद है कि इससे सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को व्यवहार में लागू करना आसान होगा और व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
मंत्रालय ने मसौदे पर प्राप्त सभी सुझावों का अध्ययन करने के बाद अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। संशोधित कानून लागू होने पर स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा से जुड़ी कानूनी व्यवस्था पहले से अधिक स्पष्ट और सख्त होने की उम्मीद है।
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