भद्रपुर प्रादेशिक अस्पताल में प्रसूति सेवा एक साल में दोगुनी
भद्रपुर के प्रादेशिक अस्पताल में प्रसव कराने पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या एक साल में दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर बढ़े हैं, सेवाओं का दायरा भी बढ़ा है। इसका असर अब प्रसूति सेवा के आंकड़ों में साफ दिख रहा है।
आर्थिक वर्ष 2082/83 में अस्पताल में 1,708 महिलाओं ने प्रसव सेवा ली। इससे ठीक पहले 2081/82 में यह संख्या केवल 787 थी। यानी एक साल के भीतर 921 ज्यादा महिलाएं प्रसव के लिए इस सरकारी अस्पताल पहुंचीं।
अस्पताल के पिछले वर्षों के आंकड़े देखें तो यह बढ़ोतरी सामान्य बदलाव से कहीं ज्यादा है। आर्थिक वर्ष 2080/81 में यहां 819 प्रसव हुए थे। अगले साल संख्या थोड़ी घटकर 787 रह गई थी। इसके बाद 2082/83 में यह सीधे 1,708 तक पहुंच गई।
सामान्य प्रसव से ज्यादा सिजेरियन
महिलाओं की संख्या बढ़ने के साथ एक और आंकड़ा ध्यान खींचता है। पिछले आर्थिक वर्ष में अस्पताल में सामान्य प्रसव की तुलना में ऑपरेशन से ज्यादा बच्चे पैदा हुए।
अस्पताल की तथ्यांक शाखा के सूचना संयोजक जेनिस घले के मुताबिक, कुल 1,708 प्रसव में 765 सामान्य तरीके से हुए। 922 महिलाओं का ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया गया। वहीं जटिलता वाले 21 मामलों में वैक्यूम तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
यानी अस्पताल में आधे से ज्यादा प्रसव सिजेरियन के जरिए हुए। बढ़ती संख्या के बीच यह आंकड़ा प्रसूति सेवा और ऑपरेशन की जरूरतों को भी सामने रखता है।
अब तीन स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
अस्पताल ने इस बीच विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ाई है। पहले प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ के तौर पर डॉ. एलिजा गौतम अकेले सेवा दे रही थीं।
निमित्त प्रमुख मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय कुमार गुप्ता के अनुसार, पिछले साल डॉ. विपा पोखरेल अस्पताल से जुड़ीं। चालू वर्ष के असार महीने से डॉ. एलिजा भट्टराई ने भी सेवा शुरू कर दी है।
अब अस्पताल में तीन प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ नियमित रूप से उपलब्ध हैं।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सिर्फ डॉक्टरों की संख्या बढ़ना ही इसकी वजह नहीं है। प्रसूति सेवा की पहुंच और व्यवस्था में सुधार के बाद सरकारी अस्पताल में सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज मिलने का विश्वास भी बढ़ा है। भद्रपुर के साथ आसपास के इलाकों से भी महिलाएं अब निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बजाय प्रादेशिक अस्पताल का रुख कर रही हैं।
बढ़ती भीड़ के साथ अस्पताल की जिम्मेदारी भी बढ़ी
एक ही साल में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या दोगुनी से ज्यादा होना अस्पताल के लिए बड़ी बढ़ोतरी है। यह सरकारी स्वास्थ्य सेवा पर बढ़ते भरोसे की तस्वीर तो दिखाता है, लेकिन इसके साथ अस्पताल पर दबाव भी बढ़ा है।
अब चुनौती इस बढ़ी हुई संख्या के हिसाब से व्यवस्था बनाए रखने की है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, ऑपरेशन की सुविधा और प्रसव के दौरान जरूरी देखभाल की क्षमता लगातार बनाए रखना अस्पताल के लिए उतना ही जरूरी होगा।
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