आशिका का चिरीबाबु से सवाल– अपनी सरकार में समझौता क्यों नहीं तोड़ा?
काठमांडू उपत्यका में फोहोर व्यवस्थापन को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस में आ गया है। प्रतिनिधिसभा सदस्य आशिका तामाङ ने ललितपुर महानगरपालिका के मेयर चिरीबाबु महर्जन से सार्वजनिक तौर पर पूछा है कि अगर पुराना समझौता स्थानीय सरकार के लिए बाधा था, तो उसे समय रहते खत्म कराने की पहल क्यों नहीं की गई।
मेयर महर्जन ने हाल में फिनिस कंपनी और नेपाल सरकार के बीच हुए एक समझौते का जिक्र करते हुए कहा था कि इसकी वजह से स्थानीय तह अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से फोहोर व्यवस्थापन नहीं कर पा रहे हैं। इसी दावे पर तामाङ ने सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि अगर यह समझौता वास्तव में समस्या की जड़ था, तो जिम्मेदार राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व ने इतने साल तक इसे बदलने या खत्म करने की कोशिश क्यों नहीं की।
‘सत्ता में रहते हुए पहल क्यों नहीं हुई?’
तामाङ ने उस दौर की भी याद दिलाई है जब संघ, प्रदेश और स्थानीय तह तक एक ही राजनीतिक शक्ति का प्रभाव था। उनका सवाल है कि ऐसी स्थिति में भी फोहोर व्यवस्थापन से जुड़ी कानूनी या नीतिगत रुकावट दूर करने के लिए ठोस राजनीतिक पहल क्यों नहीं हुई।
उन्होंने मेयर महर्जन को निशाना बनाते हुए कहा है कि अगर समझौता स्थानीय सरकार के काम में बाधा बन रहा था, तो इसके खिलाफ उसी समय आवाज उठनी चाहिए थी।
यह सवाल सिर्फ राजनीतिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। इसके पीछे बन्चरेडाँडा और आसपास के लोगों की वह नाराजगी भी है, जो वर्षों से फोहोर ढुलाई और विसर्जन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
बन्चरेडाँडा के लोगों की परेशानी भी उठाई
तामाङ ने कहा है कि फोहोर व्यवस्थापन की समस्या नई नहीं है। बन्चरेडाँडा क्षेत्र के स्थानीय लोग लंबे समय से इसके असर, सरकारी वादों और सहमतियों के पालन को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
उनका आरोप है कि प्रभावित लोगों की समस्या सामने रहते हुए भी जिम्मेदार निकायों की ओर से पर्याप्त पहल नहीं की गई।
काठमांडू उपत्यका का फोहोर बन्चरेडाँडा ले जाने को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। स्थानीय लोगों की मांग, पर्यावरणीय असर, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाएं तथा सरकार के साथ हुए समझौतों के पालन का मुद्दा बार-बार उठता रहा है।
फिनलैंड के अनुदान पर भी सवाल
तामाङ ने फिनलैंड सरकार की ओर से बन्चरेडाँडा से जुड़े एक परियोजना के लिए दिए गए अनुदान के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया है।
हालांकि सोशल मीडिया पर उन्होंने अनुदान को लेकर जो आरोप और सवाल उठाए हैं, उनके समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया गया विवरण पोस्ट में पेश नहीं किया गया है। ऐसे में इस हिस्से को आरोप और सार्वजनिक सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल मेयर महर्जन के बयान और सांसद तामाङ के जवाब ने एक पुराने सवाल को फिर सामने ला दिया है—काठमांडू उपत्यका के फोहोर की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
स्थानीय सरकारें, संघीय सरकार और फोहोर विसर्जन क्षेत्र के बासिन्दों के बीच यह विवाद वर्षों से चलता आया है। पुराने समझौते, सरकारी निर्णय और अधूरे वादे आज की समस्या में कितनी भूमिका निभा रहे हैं, अब बहस फिर इसी तरफ लौटती दिख रही है।
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