27 साल बाद वीरगंज चीनी मिल फिर शुरू करने की तैयारी
करीब तीन दशक से बंद वीरगंज चीनी मिल को दोबारा चलाने की संभावना तलाशने के लिए सरकार ने अब कारखाने की वास्तविक हालत की जांच शुरू कर दी है। सरकारी तकनीकी टीम मिल परिसर पहुंची है और यह देख रही है कि पुरानी मशीनें, उपकरण और भवन आज किस स्थिति में हैं और इनमें से कितना हिस्सा फिर इस्तेमाल किया जा सकता है।
उद्योग मंत्री गौरीकुमारी यादव के निर्देश पर मंत्रालय ने इसके लिए एक कार्यदल बनाया है। सीडीई श्रीकांत यादव के नेतृत्व वाली टीम ने मंगलवार को मिल का स्थलगत निरीक्षण किया। टीम ने मशीनरी और उपकरणों के साथ कारखाने के भवन और दूसरी भौतिक संरचनाओं की भी जांच की।
15 दिन में सरकार को मिलेगी रिपोर्ट
फिलहाल सरकार ने मिल को दोबारा खोलने का अंतिम फैसला नहीं किया है। उससे पहले तकनीकी स्थिति साफ की जा रही है।
कार्यदल को 15 दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। इसमें यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मौजूदा मशीनरी और ढांचे का कितना हिस्सा काम में लिया जा सकता है और उत्पादन दोबारा शुरू करने के लिए किस स्तर की तकनीकी तैयारी की जरूरत होगी।
लंबे समय से बंद पड़े कारखाने के मामले में यह सवाल अहम है। करीब 27 साल तक उत्पादन नहीं होने के कारण केवल पुरानी मशीनों की मौजूदगी से मिल को दोबारा चालू करना संभव नहीं माना जा सकता। उनकी मौजूदा हालत, मरम्मत की जरूरत और उपलब्ध ढांचे की उपयोगिता का आकलन जरूरी है।
इसी वजह से सरकार अभी सीधे संचालन की घोषणा करने के बजाय तकनीकी अध्ययन के नतीजे का इंतजार कर रही है।
सिर्फ एक बंद कारखाने का सवाल नहीं
वीरगंज चीनी मिल का मामला केवल एक उद्योग को फिर से खोलने तक सीमित नहीं है। 27 साल से निष्क्रिय पड़ी औद्योगिक संरचना का आगे क्या किया जाए और उसे दोबारा उत्पादन से जोड़ा जा सकता है या नहीं, यह भी इस पहल का अहम हिस्सा है।
अगर मौजूदा ढांचा और मशीनरी उपयोग के लायक मिलते हैं तो सरकार के सामने मिल को पुनर्जीवित करने की दिशा में आगे बढ़ने का आधार होगा। वहीं बड़े स्तर पर बदलाव या नई तकनीकी व्यवस्था की जरूरत सामने आती है तो अगला फैसला उसी हिसाब से लेना होगा।
अभी सबसे अहम कार्यदल की रिपोर्ट है।
फिलहाल इतना जरूर है कि लंबे समय से बंद वीरगंज चीनी मिल को लेकर सरकारी प्रक्रिया फिर औपचारिक रूप से आगे बढ़ी है। कारखाने के भीतर पहुंचकर तकनीकी मूल्यांकन शुरू होने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि 15 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट मिल के भविष्य को लेकर क्या तस्वीर सामने रखती है।
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