साल्ट ट्रेडिंग का नया विकल्प: निजी प्लांट से एसटीसी गैस

Hindi News Desk
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साल्ट ट्रेडिंग का नया विकल्प: निजी प्लांट से एसटीसी गैस

पृथ्वीराजमार्ग पूरी तरह बंद होने के बाद काठमांडू में एसटीसी रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। धादिङ में अपने एलपीजी प्लांट तक गैस बुलेट नहीं पहुंच पाने के कारण कॉरपोरेशन अब निजी प्लांटों में एसटीसी सिलेंडर भरवा रहा है।

धादिङ के कृष्णभीर इलाके में पिछले रविवार त्रिशूली नदी के कटाव से सड़क बंद हो गई थी। इसका सीधा असर जुगेखोला स्थित साल्ट ट्रेडिंग के एलपीजी प्लांट पर पड़ा। गैस लेकर आने वाले बुलेट प्लांट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

ऐसे में कॉरपोरेशन ने अपने प्लांट के खुलने का इंतजार करने के बजाय मनोज और बाबा गैस के प्लांटों से सहयोग लिया है। एसटीसी के खाली सिलेंडर वहां भेजे जा रहे हैं। भरने के बाद इन्हें वैकल्पिक सड़क से काठमांडू लाया जाएगा।

अपने प्लांट के लिए भेजे गए कुछ गैस बुलेट भी अब इन निजी प्लांटों की ओर मोड़ दिए गए हैं।

साल्ट ट्रेडिंग के सहायक मुख्य कार्यकारी अधिकारी बज्रेश झा के मुताबिक, निजी प्लांटों में भरे गए एसटीसी सिलेंडरों की पहली खेप शुक्रवार तक काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है। कॉरपोरेशन की कोशिश है कि सड़क संकट का असर सीधे उपभोक्ताओं की रसोई तक न पहुंचे।

मांग ज्यादा, लेकिन एसटीसी का गैस कोटा सीमित

सड़क बंद होने से पैदा हुई समस्या के बीच एसटीसी के सामने एक पुरानी सीमा भी है। बाजार में उसके गैस सिलेंडर की मांग है, लेकिन नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन से मिलने वाला कोटा सीमित होने के कारण आपूर्ति मनचाहे स्तर तक नहीं बढ़ाई जा सकती।

भारतीय ऑयल कॉरपोरेशन से कुल 3,025 गैस बुलेट लाने की व्यवस्था में साल्ट ट्रेडिंग के हिस्से में करीब दो प्रतिशत यानी 53 बुलेट आते हैं।

कॉरपोरेशन के आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने करीब 55 हजार से 60 हजार एसटीसी सिलेंडर की खपत हो रही है। सीमित आपूर्ति के बीच वितरण बिगड़ने न पाए, इसके लिए कूपन व्यवस्था अपनाई गई है।

उपभोक्ता को कूपन देते समय ही यह तय कर दिया जाता है कि उसे गैस किस दिन मिलेगी। कॉरपोरेशन का कहना है कि इससे उपलब्ध सिलेंडरों को व्यवस्थित तरीके से बांटना आसान हुआ है।

नमक की चिंता नहीं, छह महीने का स्टॉक मौजूद

गैस की आपूर्ति पर दबाव जरूर है, लेकिन आयोडीन युक्त नमक के मामले में फिलहाल स्थिति सहज है।

17 भदौ तक देशभर के गोदामों में 1 लाख 27 हजार 361 मीट्रिक टन नमक का भंडार मौजूद था। साल्ट ट्रेडिंग का आकलन है कि यह मात्रा करीब छह महीने की जरूरत पूरी कर सकती है।

नेपाल में सालाना दो लाख टन से ज्यादा आयोडीन युक्त नमक की खपत होती है। पिछले आर्थिक वर्ष में कॉरपोरेशन ने करीब 2 लाख 10 हजार टन नमक की बिक्री और वितरण किया था।

सरकार लंबे समय से आयोडीन युक्त नमक आम लोगों तक आसानी से पहुंचाने की नीति पर काम करती रही है। इसी के तहत दो बच्चों के चिन्ह वाले आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाता है।

खासकर प्राकृतिक आपदा और आपूर्ति संकट के समय नमक जैसी जरूरी चीज की उपलब्धता संवेदनशील मुद्दा बन जाती है। उपभोक्ता अधिकार से जुड़े पक्ष भी ऐसी वस्तुओं के वितरण में सार्वजनिक संस्थाओं की भूमिका बनाए रखने की जरूरत उठाते रहे हैं।

बाजार में चीनी 135 रुपये तक, एसटीसी में 100 रुपये

साल्ट ट्रेडिंग ने चीनी की बढ़ती कीमत के बीच अपनी रियायती बिक्री भी जारी रखी है। निजी बाजार में जहां चीनी की कीमत प्रति किलो 135 रुपये तक पहुंच रही है, वहीं एसटीसी इसे 100 रुपये प्रति किलो में बेच रहा है।

कॉरपोरेशन के अनुसार, 9 भदौ को ही 600 टन चीनी आयात की गई थी। हाल के समय में करीब तीन हजार टन चीनी बाजार में भेजी जा चुकी है।

चावल, दाल, खाद्य तेल और दूसरी रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने के बीच साल्ट ट्रेडिंग का कहना है कि वह अपने यहां बिकने वाले खाद्य सामान की कीमत स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है।

बज्रेश झा के मुताबिक, कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी केवल व्यापार और मुनाफे तक सीमित नहीं है। नमक, गैस और दूसरी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सामान्य दिनों के साथ संकट के समय भी जारी रखना उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।

पृथ्वीराजमार्ग बंद होने से इस बार एसटीसी का अपना एलपीजी प्लांट सीधे प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद निजी प्लांटों में अपने सिलेंडर भरवाने का फैसला बताता है कि सड़क और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में जरूरी सामान की आपूर्ति केवल एक रास्ते या एक प्लांट पर निर्भर नहीं रखी जा सकती।

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