जापान में जापानी घटे, विदेशी आबादी तेजी से बढ़ी
जापान में कम जन्मदर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी का असर अब और साफ दिखने लगा है। 2025 की जनगणना में देश की कुल आबादी पांच साल में 31 लाख 70 हजार घट गई। इसी दौरान विदेशी निवासियों की संख्या करीब 40 फीसदी बढ़ी है।
जापान के आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय की ओर से जारी अंतिम नतीजों के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2025 को देश की आबादी 12 करोड़ 29 लाख 72 हजार 528 थी। इसमें जापानी नागरिकों के साथ विदेशी निवासी भी शामिल हैं। 2020 की तुलना में कुल आबादी 2.5 फीसदी कम हुई है।
जापान में हर पांच साल में राष्ट्रीय जनगणना होती है। इसकी शुरुआत 1920 में हुई थी। यह लगातार तीसरी जनगणना है, जब देश की आबादी पिछली गणना के मुकाबले घटी है।
इस बार एक और बदलाव खास तौर पर सामने आया है। जापानी नागरिकों की संख्या जिस रफ्तार से कम हो रही है, विदेशी आबादी लगभग उसी समय तेजी से बढ़ रही है।
जापानी नागरिक घटे, विदेशी आबादी बढ़ी
पांच साल में जापानी नागरिकों की संख्या 3.5 फीसदी घटकर करीब 11 करोड़ 91 लाख रह गई। पिछली जनगणना में यह गिरावट 1.4 फीसदी थी। यानी जापानी नागरिकों की आबादी घटने की रफ्तार पहले से तेज हुई है।
इसके उलट 2025 में जापान में विदेशी निवासियों की संख्या 38 लाख 40 हजार 39 दर्ज की गई। यह 2020 के मुकाबले 10 लाख 93 हजार 525 ज्यादा है। पांच साल में करीब 39.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
विदेशी आबादी में चीनी नागरिक सबसे बड़ा समुदाय हैं। कुल विदेशी निवासियों में उनकी हिस्सेदारी 24 फीसदी है। वियतनामी नागरिक 15.9 फीसदी के साथ दूसरे बड़े समूह के रूप में सामने आए हैं।
दक्षिण और उत्तर कोरियाई नागरिकों की संयुक्त हिस्सेदारी 10.4 फीसदी रह गई है।
यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि 2020 में तस्वीर अलग थी। उस समय दक्षिण और उत्तर कोरियाई नागरिकों की संयुक्त हिस्सेदारी 15.8 फीसदी और वियतनामी नागरिकों की 13.9 फीसदी थी। पांच साल में वियतनामी समुदाय उनसे आगे निकल गया है।
विदेशी निवासियों की बढ़ती संख्या में वियतनामी लोगों के साथ नेपाली समुदाय की बढ़ोतरी का भी योगदान रहा है।
देश घट रहा है, टोकियो की आबादी बढ़ी
जापान के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीर देखें तो आबादी का टोकियो की ओर झुकाव और बढ़ा है।
देश के 47 प्रिफेक्चर में टोकियो अकेला ऐसा प्रिफेक्चर रहा, जहां 2020 से 2025 के बीच आबादी बढ़ी। हालांकि टोकियो में भी बढ़ोतरी की रफ्तार पिछली जनगणना अवधि के मुकाबले कम रही।
साइतामा, चिबा, कानागावा, आइची, शिगा, फुकुओका और ओकिनावा में पिछली बार आबादी बढ़ी थी। इस बार ये सभी घटती आबादी वाले प्रिफेक्चर में शामिल हो गए।
बाकी 39 प्रिफेक्चर में भी आबादी कम हुई है। इनमें से कई जगह गिरावट की रफ्तार पिछले पांच साल की तुलना में ज्यादा रही।
दूसरी तरफ टोकियो महानगरीय क्षेत्र में अब जापान की कुल आबादी का 30.1 फीसदी हिस्सा रहता है। जनगणना के इतिहास में पहली बार देश की 30 फीसदी से ज्यादा आबादी इस महानगरीय क्षेत्र में केंद्रित हुई है।
लोग कम हुए, लेकिन घरों की संख्या बढ़ी
आबादी घटने के बावजूद जापान में परिवार या हाउसहोल्ड की संख्या बढ़कर 5 करोड़ 73 लाख हो गई है। इसके पीछे एक बड़ा कारण परिवारों का छोटा होते जाना है।
2020 में एक परिवार में औसतन 2.21 लोग रहते थे। अब यह आंकड़ा घटकर 2.1 रह गया है।
यामागाता में औसत परिवार का आकार देश में सबसे बड़ा है। यहां एक घर में औसतन 2.41 लोग रहते हैं। टोकियो में यह संख्या सिर्फ 1.85 है।
यानी एक तरफ देश की आबादी कम हो रही है, दूसरी तरफ छोटे परिवार और अकेले रहने वाले लोगों की वजह से घरों की संख्या बढ़ रही है।
टोयामा की जनगणना पर उठे सवाल
राष्ट्रीय स्तर पर आबादी के बड़े बदलाव सामने आने के बीच टोयामा शहर की जनगणना को लेकर अलग विवाद खड़ा हो गया है।
आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय के मुताबिक, मध्य जापान के टोयामा शहर की आबादी कम से कम दो हजार ज्यादा दर्ज किए जाने का संदेह है। आरोप है कि आबादी अधिक दिखाने के लिए सर्वेक्षण फॉर्म दोबारा लिखे गए और इसमें शहर के एक से ज्यादा अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, कुछ मामलों में जनगणना कर्मचारियों ने किसी संपत्ति में लोगों के रहने के संकेत नहीं मिलने की जानकारी दी थी। इसके बावजूद पर्याप्त आधार के बिना वहां परिवार रहने की बात दर्ज किए जाने का संदेह है।
मामले में मंत्रालय ने सांख्यिकी कानून के उल्लंघन के आरोप में एक अज्ञात अधिकारी के खिलाफ टोयामा पुलिस में शिकायत दी है। जनगणना से जुड़े किसी मामले में मंत्रालय की ओर से पुलिस में इस तरह की शिकायत किए जाने का यह पहला मामला है।
अंतिम जनगणना में टोयामा शहर की आबादी 3 लाख 99 हजार 197 तय की गई है। यह मई में जारी शुरुआती आंकड़े से 2,936 कम है।
सिर्फ आबादी का आंकड़ा नहीं है जनगणना
जापान के लिए जनगणना का महत्व केवल यह जानने तक सीमित नहीं है कि देश में कितने लोग रहते हैं। केंद्र और स्थानीय सरकारें कम जन्मदर से निपटने की नीतियों से लेकर क्षेत्रीय और औद्योगिक विकास की योजनाओं तक में इन आंकड़ों का इस्तेमाल करती हैं।
प्रतिनिधि सभा की एकल सदस्यीय निर्वाचन सीटों की सीमाएं तय करने में भी जनगणना के आंकड़े आधार बनते हैं। इसी वजह से टोयामा का मामला आंकड़ों की सटीकता और जनगणना की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है।
2025 की तस्वीर एक साथ कई बदलाव दिखाती है। जापानी नागरिकों की संख्या तेजी से घट रही है, परिवार छोटे हो रहे हैं और आबादी टोकियो के आसपास ज्यादा सिमट रही है। इसी बीच विदेशी निवासियों की बढ़ती मौजूदगी जापान की जनसांख्यिक तस्वीर को धीरे-धीरे बदल रही है।
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