आशिका तामाङ और सभामुख के बीच बोलने के समय पर विवाद
प्रतिनिधिसभा की सोमवार की बैठक में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) की सांसद आशिका तामाङ और सभामुख डीपी अर्याल के बीच बोलने के समय को लेकर कुछ देर सवाल-जवाब की स्थिति बन गई। तामाङ आकस्मिक समय में अपनी बात रखना चाहती थीं, लेकिन सभामुख ने शुरुआत में इसकी अनुमति नहीं दी।
सभामुख का कहना था कि सांसद जिस मुद्दे को उठाना चाहती हैं, वह आकस्मिक प्रकृति का नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उस विषय पर सरकार का ध्यान पहले ही दिलाया जा चुका है।
इसके बाद सभामुख ने तामाङ से अपनी सीट पर बैठने को कहा। तामाङ हालांकि खड़ी रहीं और अपनी बात रखने की कोशिश करती रहीं।
सभामुख ने याद दिलाई सदन की मर्यादा
स्थिति कुछ देर तक ऐसी ही बनी रही तो सभामुख अर्याल ने तामाङ को संसदीय प्रक्रिया और प्रतिनिधिसभा की मर्यादा का पालन करने को कहा।
उन्होंने कहा, ‘माननीय सदस्य आशिका तामाङ, यह प्रतिनिधिसभा है। यहां की मर्यादा कायम रखिए। मैंने माननीय सदस्य को समय नहीं दिया है, माइक भी नहीं दिया है। इसलिए माननीय सदस्य इस तरह लगातार नहीं बोलें।’
सभामुख के बार-बार बैठने के आग्रह के बावजूद तामाङ अपनी जगह पर खड़ी रहीं। इससे कुछ समय के लिए बैठक का ध्यान इसी विषय पर टिक गया।
आखिरकार सभामुख ने उन्हें बोलने का समय दिया, जिसके बाद तामाङ ने अपना विषय सदन के सामने रखा।
आकस्मिक समय को लेकर क्यों बनी स्थिति?
प्रतिनिधिसभा में आकस्मिक समय का इस्तेमाल ऐसे मामलों को उठाने के लिए किया जाता है, जिनका तत्काल सार्वजनिक महत्व हो। सोमवार को असहमति इसी बात पर थी कि तामाङ जिस विषय को उठाना चाहती थीं, उसे आकस्मिक समय में रखने की अनुमति दी जाए या नहीं।
सभामुख ने पहले इसे आकस्मिक विषय नहीं माना और समय देने से इनकार किया। तामाङ अपनी बात रखने पर अड़ी रहीं। इसी वजह से सदन में कुछ देर असहज स्थिति बनी और संसदीय प्रक्रिया को लेकर सभामुख को उन्हें सीधे सचेत करना पड़ा।
बाद में बोलने की अनुमति मिलने के साथ ही यह स्थिति खत्म हुई और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
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