बांग्लादेश में पिछले कई दशकों का सबसे भयावह खसरा संकट फैल गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ पिछले दो महीनों में 500 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर दबाव बढ़ गया है।
15 मार्च से जुटाए गए स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार शनिवार तक मौतों का आंकड़ा 512 पहुंच चुका है। पिछले 24 घंटों में ही 13 बच्चों की जान गई है।
संक्रमित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण राजधानी ढाका समेत देश के कई शहरों के अस्पतालों में मरीजों का दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया है। खसरा संक्रमित बच्चों के लिए अलग वार्ड बनाए गए हैं, लेकिन गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू बेड की कमी ने उपचार व्यवस्था को और कठिन बना दिया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मार्च से 23 मई तक पूरे देश में 62 हजार से ज्यादा संदिग्ध खसरा संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इनमें से कम से कम 8 हजार 494 मामलों की प्रयोगशाला जांच से पुष्टि हो चुकी है। सबसे ज्यादा प्रभावित पांच साल से कम उम्र के बच्चे हैं।
खसरा बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है, जो खांसी और छींक के जरिए तेजी से फैलती है। संक्रमण होने के बाद इसका कोई विशेष इलाज नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक निमोनिया, मस्तिष्क में सूजन और गंभीर श्वसन संबंधी जटिलताओं के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो रही है।
अस्पतालों पर बढ़ता दबाव, गंभीर हालत में पहुंच रहे बच्चे
ढाका के अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि कई बच्चे अस्पताल पहुंचने तक बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच चुके होते हैं।
शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ ऐनुल इस्लाम खान के मुताबिक कई संक्रमित बच्चों में फेफड़ों, गले और आंखों में गंभीर संक्रमण देखा जा रहा है।
पिछले कुछ हफ्तों से बाल रोग वार्डों में लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने कुपोषण को भी इस संकट का बड़ा कारण बताया है। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के कई बच्चे नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए या कुपोषण के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई।
ग्रामीण इलाकों और कम आय वाले घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में पिछले महीनों के दौरान संक्रमण तेजी से फैला है।
राजनीतिक अस्थिरता के बाद प्रभावित हुआ टीकाकरण अभियान
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनिसेफ के अनुसार वर्ष 2024 में सरकार विरोधी छात्र आंदोलन और उसके बाद पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता के कारण बांग्लादेश का नियमित टीकाकरण कार्यक्रम गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था।
उस दौरान बड़ी संख्या में बच्चे नियमित प्रतिरक्षण से बाहर हो गए।
बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राना फ्लावर्स के अनुसार सरकार फिलहाल आपातकालीन टीकाकरण अभियान चला रही है और अब तक करीब 1 करोड़ 80 लाख बच्चों तक वैक्सीन पहुंचाई जा चुकी है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देगा और संक्रमण को नियंत्रण में आने में अभी और समय लग सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी नियमित टीकाकरण दर में आई गिरावट को मौजूदा प्रकोप का मुख्य कारण बताया है।
सरकार का दावा है कि कुछ जिलों में संक्रमण दर कम होने लगी है, लेकिन अस्पतालों में रोज भर्ती हो रहे बच्चों की स्थिति देखकर यह संकट अभी खत्म होता नहीं दिख रहा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खसरा दुनिया की सबसे संक्रामक बीमारियों में से एक है, लेकिन समय पर दो डोज वैक्सीन लगने से इसके खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।