इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में मंगलवार को आए 6.7 तीव्रता के भूकंप ने लोगों को एक बार फिर डर के माहौल में ला दिया। झटके इतने तेज थे कि कई इलाकों में लोग घरों, दफ्तरों और होटलों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर भागे। सबसे ज्यादा असर मध्य सुलावेसी प्रांत की राजधानी पालु और उसके आसपास के क्षेत्रों में महसूस किया गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र पालु से करीब 42 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था। इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है। मुख्य झटके के बाद कई पराकंप भी महसूस किए गए, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई।
भूकंप के तुरंत बाद कई जगहों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एहतियात के तौर पर कुछ अस्पतालों ने मरीजों को अस्थायी रूप से भवनों के बाहर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कुछ इमारतों की दीवारों में दरारें और छतों के हिस्सों को नुकसान पहुंचा दिखाई दे रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में हालात का आकलन शुरू कर दिया है। अब तक किसी बड़े जानमाल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षति का पूरा ब्यौरा जुटाने का काम जारी है।
समुद्र तटों से दूर रहे लोग
भूकंप के बाद तटीय इलाकों में कुछ समय के लिए लोगों के बीच सुनामी की आशंका भी फैल गई। बड़ी संख्या में लोग समुद्र किनारे वाले क्षेत्रों से दूर चले गए।
इसके पीछे एक बड़ी वजह 2018 की वह त्रासदी है, जब इसी क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप और उसके बाद उठी सुनामी ने भारी तबाही मचाई थी। उस घटना की याद आज भी यहां के लोगों के मन में गहराई से मौजूद है।
हालांकि इस बार इंडोनेशिया की मौसम और भूभौतिक एजेंसी ने स्पष्ट किया कि भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है।
2018 की तबाही की याद फिर ताजा
पालु के निवासियों के लिए भूकंप केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पुराने घावों की याद भी है। वर्ष 2018 में आए 7.5 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद की सुनामी में हजारों लोगों की मौत हुई थी। उस आपदा ने पूरे क्षेत्र को लंबे समय तक प्रभावित किया था।
इसी वजह से इस बार भी कई परिवारों ने झटकों के बाद रात घरों के भीतर बिताने के बजाय खुले स्थानों में रहना सुरक्षित समझा। लोगों को लगातार पराकंप आने की आशंका बनी हुई है।
भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है इंडोनेशिया
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। यह प्रशांत महासागर के उस क्षेत्र में स्थित है जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यहां कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, जिसके कारण भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर होती रहती हैं।
अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और संभावित पराकंपों के दौरान सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।