बाढ़ प्रभावित बच्चों की फोटो-वीडियो पोस्ट न करने की अपील
भोटेकोशी से होते हुए त्रिशुली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है। इसी बीच राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद ने राहत में जुटे लोगों और संस्थाओं से एक जरूरी अपील की है। परिषद ने कहा है कि बाढ़ से प्रभावित बच्चों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया या समाचार माध्यमों में सार्वजनिक न किए जाएं।
परिषद की चिंता खास तौर पर उन तस्वीरों और वीडियो को लेकर है, जिनसे किसी बच्चे की पहचान सामने आती हो या उसकी निजी जिंदगी और सम्मान पर असर पड़ सकता हो।
बाढ़ के बाद बच्चों को सुरक्षित निकालने, राहत पहुंचाने या दूसरी जरूरी सेवाएं देने के दौरान कई तस्वीरें और वीडियो बनाए जाते हैं। परिषद का कहना है कि मदद के ऐसे कामों को दिखाते समय बच्चों की पहचान और उनकी स्थिति को सार्वजनिक करने से बचना जरूरी है।
राहत के दौरान भी बच्चों की निजता का रखें ध्यान
परिषद ने इस संबंध में विज्ञप्ति जारी कर बचाव, राहत और सहयोग में शामिल व्यक्ति और संस्थाओं को संवेदनशील रहने को कहा है।
उसका कहना है कि आपदा से गुजर रहे बच्चों की परेशानी या असहाय स्थिति को सार्वजनिक सामग्री के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। मदद जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी बच्चे की निजता, सम्मान और गरिमा को सुरक्षित रखना भी है।
खास तौर पर ऐसी सामग्री साझा न करने की अपील की गई है, जिसमें प्रभावित बच्चे को पहचाना जा सकता हो या उसकी स्थिति इस तरह दिखाई गई हो जिससे उसकी गोपनीयता प्रभावित होती हो।
सोशल मीडिया से लेकर समाचार माध्यमों तक अपील
परिषद ने फेसबुक, मेसेंजर, यूट्यूब, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, थ्रेड्स, स्नैपचैट, वाइबर, व्हाट्सऐप और एक्स समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट या साझा न करने को कहा है।
यह अपील केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। समाचार माध्यमों से भी बाढ़ प्रभावित बच्चों की पहचान उजागर करने वाली तस्वीरें और वीडियो प्रकाशित या प्रसारित न करने को कहा गया है।
भदौ 10 को भोटेकोशी से होते हुए त्रिशुली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत गतिविधियां चल रही हैं। ऐसे समय परिषद ने राहत में जुटे सभी पक्षों से कहा है कि बच्चों की मदद करते हुए उनकी गरिमा और निजता को भी प्राथमिकता दी जाए।
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