अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स का बहुमत, ट्रंप को बड़ा झटका
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद के दोनों सदनों, प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे के बाद ट्रंप के लिए अपने बाकी दो साल के कार्यकाल में बड़े फैसले लेना आसान नहीं होगा।
अब अमेरिकी संसद की कमान डेमोक्रेट्स के हाथ में होगी, जबकि व्हाइट हाउस में रिपब्लिकन राष्ट्रपति बने रहेंगे। ऐसे में सरकार को कई अहम मुद्दों पर विपक्ष का समर्थन लेना पड़ सकता है।
डेमोक्रेट्स की जीत से संसद में शक्ति संतुलन बदल गया है। पार्टी अब ट्रंप प्रशासन के प्रमुख विधेयकों को रोक सकती है। राष्ट्रपति की ओर से प्रस्तावित नियुक्तियों पर भी सीनेट की भूमिका अहम होगी। इसके अलावा संसदीय समितियों के जरिए प्रशासन के फैसलों और कामकाज की जांच का रास्ता खुल गया है।
चुनावी हार के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की संभावना से इनकार नहीं किया है।
सीएनबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि व्यापार और अमेरिकी उद्योगों को दोबारा मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर दोनों पार्टियों के बीच सहमति बन सकती है।
हालांकि, संसद में बदले समीकरणों के बीच ट्रंप को अपनी नीतियां आगे बढ़ाने के लिए डेमोक्रेटिक सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। खासकर उन फैसलों पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिनका विपक्ष पहले से विरोध करता रहा है।
अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बीच इजरायल के साथ संबंधों को लेकर भी डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
वर्मोंट से डेमोक्रेटिक सीनेटर पीटर वेल्च ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंध गंभीर रूप से कमजोर हो चुके हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में वेल्च ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार को लेकर डेमोक्रेट्स के बीच बढ़ते अविश्वास का जिक्र किया।
उनके मुताबिक, गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और ईरान के साथ संघर्ष ने अमेरिकी राजनीति पर भी असर डाला है। इन मुद्दों को लेकर डेमोक्रेटिक सांसदों के बीच नेतन्याहू सरकार के प्रति विरोध बढ़ा है।
इजरायल के साथ रक्षा सहयोग और मजबूत करने के लिए रिपब्लिकन पार्टी की ओर से लाए गए प्रस्ताव पर भी इसका असर पड़ सकता है।
अमेरिकी संसद में बहुमत बदलने का असर केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रह सकता।
डेमोक्रेट्स अब विदेश नीति से जुड़े फैसलों, रक्षा सहयोग और प्रशासन की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अधिक प्रभाव डाल सकेंगे। इजरायल के साथ संबंध भी आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकते हैं।
फिलहाल ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष के नियंत्रण वाली संसद के साथ काम करने की है। अगले दो वर्षों में उनकी सरकार कितनी आसानी से अपने फैसले लागू कर पाएगी, यह काफी हद तक दोनों पार्टियों के बीच बनने वाली सहमति पर निर्भर करेगा।
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