इमरान खान की रिहाई की मांग, हजारों समर्थक इस्लामाबाद की ओर
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग एक बार फिर सड़कों पर है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के पांच हजार से ज्यादा समर्थक खैबर पख्तूनख्वा से राजधानी इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार के साथ बातचीत से रास्ता नहीं निकलने के बाद यह मार्च शुरू हुआ है।
रविवार को लक्की मरवत से निकले इस मार्च में बड़ी संख्या में लोग ट्रक, बस और कारों से शामिल हुए हैं। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री और इमरान खान के समर्थक सोहेल अफरीदी खुद इसकी अगुवाई कर रहे हैं।
पीटीआई की सबसे बड़ी मांग इमरान खान की रिहाई है। पार्टी चाहती है कि जेल में बंद खान को अस्पताल ले जाया जाए और परिवार के लोगों को उनसे मिलने में किसी तरह की परेशानी न हो।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इमरान खान की सेहत ठीक है और परिवार के साथ उनकी मुलाकात भी नियमित रूप से हो रही है।
इस्लामाबाद के रास्तों पर कंटेनर, सुरक्षा बढ़ी
हजारों लोगों के राजधानी की ओर बढ़ने के बाद इस्लामाबाद में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शहर में दाखिल होने वाले प्रमुख रास्तों और कई दूसरे इलाकों में कंटेनर लगाए गए हैं। आवाजाही पर भी नियंत्रण किया जा रहा है।
सरकार की कोशिश थी कि बातचीत के जरिए मार्च को रोका जाए। इसी सिलसिले में पीटीआई और सरकार के बीच दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
पीटीआई अध्यक्ष गौहर खान का कहना है कि दो दौर की बातचीत के बाद चर्चा आगे नहीं बढ़ी।
दूसरी तरफ गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने बातचीत नाकाम होने के लिए मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मार्च के दौरान किसी तरह की जान-माल की क्षति होती है तो उसकी जिम्मेदारी भी अफरीदी की होगी।
सरकार सुरक्षा हालात का हवाला भी दे रही है। पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में पाकिस्तानी तालिबान के हमले बढ़े हैं। ऐसे समय में हजारों लोगों के राजनीतिक मार्च को सरकार अतिरिक्त सुरक्षा चुनौती के तौर पर देख रही है।
जेल में इमरान, लेकिन सियासत के केंद्र में बने हुए हैं
इमरान खान 2023 से जेल में हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार समेत कई मामलों में कार्रवाई हुई है। खान और पीटीआई लगातार कहते रहे हैं कि ये मामले राजनीतिक वजहों से बनाए गए हैं।
लंबे समय से जेल में रहने के बावजूद इमरान खान का असर पाकिस्तान की राजनीति से कम नहीं हुआ है। पीटीआई उनकी रिहाई को लगातार बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाए हुए है। इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा मौजूदा मार्च उसी दबाव की नई कड़ी है।
इमरान खान अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटाए गए थे। इसके बाद से पाकिस्तान की राजनीति में सत्ता पक्ष और खान के समर्थकों के बीच टकराव लगातार बना हुआ है।
फरवरी 2024 के आम चुनाव के बाद शहबाज शरीफ दोबारा प्रधानमंत्री बने। पीटीआई ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया।
वार्ता रुकी, अब नजर इस्लामाबाद पर
इस मार्च का सीधा मुद्दा इमरान खान की रिहाई है, लेकिन इसके पीछे पाकिस्तान में लंबे समय से चल रही राजनीतिक खींचतान भी साफ दिखाई देती है।
एक तरफ पीटीआई अपने समर्थकों के साथ राजधानी की ओर बढ़ रही है, दूसरी तरफ सरकार ने इस्लामाबाद पहुंचने वाले रास्तों पर सख्ती बढ़ा दी है। बातचीत भी फिलहाल आगे नहीं बढ़ रही।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदर्शनकारी राजधानी तक पहुंचते हैं या सरकार उन्हें रास्ते में रोकती है। दोनों पक्षों के अपने रुख पर कायम रहने से पाकिस्तान की राजनीति में टकराव एक बार फिर सड़क पर आ गया है।
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