नेपाल में डॉक्टरों के आंदोलन से देशभर में ओपीडी सेवाएं ठप

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नेपाल में डॉक्टरों के आंदोलन से देशभर में ओपीडी सेवाएं ठप

नेपाल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मंगलवार को आकस्मिक सेवाओं को छोड़कर बाकी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखीं। यह कदम वीरगंज के नारायणी अस्पताल के डॉक्टर प्रमोद राम पर हुए हमले के विरोध में उठाया गया। इसका सबसे बड़ा असर उन मरीजों पर पड़ा जो नियमित जांच और इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे थे।

राजधानी काठमांडू समेत देश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं नहीं चल सकीं। बीर अस्पताल, त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल और सिभिल अस्पताल जैसे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में सुबह से ही मरीजों की भीड़ रही, लेकिन पर्ची तक नहीं बन सकी। कई लोग घंटों इंतजार करते रहे, जबकि कई मरीज बिना इलाज कराए वापस लौट गए।

हमले के विरोध में डॉक्टरों का प्रदर्शन

डॉक्टरों का कहना है कि इलाज के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों पर लगातार हो रहे हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। उनका कहना है कि जब तक अस्पतालों में सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित नहीं होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

चिकित्सकों ने इसी मांग को लेकर आकस्मिक सेवाओं को छोड़कर बाकी चिकित्सा सेवाएं स्थगित कर दीं।

स्वास्थ्य मंत्रालय की अपील बेअसर

स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने सभी अस्पतालों और स्वास्थ्यकर्मियों से स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं करने की अपील की। मंत्रालय के सह-प्रवक्ता डॉ. समीर कुमार अधिकारी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि डॉ. प्रमोद राम पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मंत्रालय ने मरीजों के इलाज को लगातार जारी रखने का आग्रह भी किया, लेकिन इसके बावजूद मंगलवार को देश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में नियमित ओपीडी सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं।

आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं

अस्पतालों ने बताया कि आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं, ताकि गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित न हो। हालांकि नियमित उपचार, फॉलो-अप जांच और परामर्श के लिए पहुंचे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

स्वास्थ्य सेवाओं में आई इस रुकावट से सबसे ज्यादा प्रभावित आम नागरिक रहे। अब मरीजों और उनके परिजनों की उम्मीद है कि सरकार, चिकित्सक संगठनों और संबंधित पक्षों के बीच जल्द बातचीत हो और ऐसा समाधान निकले जिससे स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से बहाल हो सकें।

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