नारायणी अस्पताल प्रकरण क्या है, क्यों भड़के देशभर के डॉक्टर?
नेपाल में मंगलवार को सरकारी और निजी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रहीं। नेपाल चिकित्सक संघ के देशव्यापी आह्वान के बाद ओपीडी समेत नियमित इलाज प्रभावित हुआ, जिससे इलाज के लिए सुबह से अस्पताल पहुंचे बड़ी संख्या में मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ा।
कई अस्पतालों में मरीज घंटों लाइन में लगकर टोकन लेने के बाद डॉक्टरों के हड़ताल पर होने की जानकारी मिलने से निराश लौटे। सबसे अधिक असर ओपीडी सेवाओं पर पड़ा, जबकि आपातकालीन और पहले से भर्ती मरीजों का इलाज जारी रखा गया।
एक घटना से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला वीरगंज स्थित नारायणी अस्पताल में 45 वर्षीय राजकुमार पटेल की मौत के बाद शुरू हुआ। परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में ले जाते समय ऑक्सीजन सपोर्ट हटाने की वजह से उनकी मौत हुई। उन्होंने अस्पताल और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान अस्पताल में तोड़फोड़ की गई और वहीं कार्यरत डॉक्टर प्रमोद राम पर हमला कर दिया गया। हमले में उनके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। फिलहाल उनका काठमांडू के ट्रमा सेंटर में इलाज चल रहा है।
सुरक्षा की मांग पर अड़े डॉक्टर
घटना के बाद डॉक्टरों ने अस्पतालों में सुरक्षित कार्य वातावरण की मांग उठाई। इस बीच अस्पताल प्रशासन, मृतक के परिजन, वीरगंज के मुख्य जिला अधिकारी और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत हुई और मामले की जांच के लिए एक समिति भी बनाई गई।
हालांकि, नारायणी अस्पताल के डॉक्टरों का आरोप है कि बैठक के दौरान अस्पताल के प्रतिनिधियों के साथ मुख्य जिला अधिकारी और पुलिस प्रमुख ने अभद्र व्यवहार किया। इसके विरोध में अस्पताल के सभी डॉक्टर आंदोलन में शामिल हो गए।
देशभर में आंदोलन का विस्तार
नेपाल चिकित्सक संघ का कहना है कि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अस्पताल में तोड़फोड़ तथा डॉक्टर पर हमला करने वाले सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी मांग के समर्थन में संघ ने पूरे देश के सरकारी और निजी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी सेवाएं बंद रखने का आह्वान किया।
इसी के तहत मंगलवार को देशभर में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं और लाखों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जांच जारी, गिरफ्तारियां भी शुरू
पुलिस ने बताया है कि नारायणी अस्पताल में तोड़फोड़ और डॉक्टर पर हमले के मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा चुका है। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान और तलाश की जा रही है।
उधर, नारायणी अस्पताल के 70 डॉक्टरों में से 30 पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। बाकी डॉक्टर भी सामूहिक इस्तीफा देने की तैयारी में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सरकार अस्पतालों में उनकी सुरक्षा की ठोस गारंटी नहीं देती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
DISCLAIMER
यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।