पिछले कुछ दिनों से फेसबुक पर एक दावा तेजी से फैल रहा है। कई यूजर्स यह कह रहे हैं कि अब फेसबुक ने कंटेंट मोनेटाइजेशन के लिए नया और आसान रास्ता खोल दिया है, जिसके तहत 28 दिनों के भीतर 3 लाख व्यूज पूरे करते ही मोनेटाइजेशन मिल सकता है।
इस चर्चा को और हवा तब मिली जब फेसबुक ने कई पेज और प्रोफाइल के मोनेटाइजेशन सेक्शन में “Unlock Content Monetization” नाम का एक नोटिफिकेशन दिखाना शुरू किया। इसमें लिखा है कि 28 दिनों के भीतर 3 लाख व्यूज हासिल करने वाले क्रिएटर्स को कंटेंट मोनेटाइजेशन के लिए आमंत्रण (इनविटेशन) मिल सकता है, बशर्ते उनका कंटेंट फेसबुक की नीतियों और नियमों के अनुरूप हो।
यहीं से भ्रम शुरू हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने यह मान लिया कि 3 लाख व्यूज पूरा होते ही मोनेटाइजेशन अपने आप चालू हो जाएगा। लेकिन खोज समाचार की पड़ताल कुछ और ही तस्वीर दिखाती है।
खोज समाचार ने खुद किया परीक्षण
फेसबुक की ओर से यह चुनौती दिखाई देने के बाद खोज समाचार ने इसकी वास्तविक स्थिति समझने के लिए व्यावहारिक परीक्षण किया।
सबसे पहले “Join Challenge” विकल्प पर क्लिक किया गया और एक नए फेसबुक पेज पर वीडियो अपलोड किया गया। जैसे-जैसे वीडियो पर व्यूज बढ़ते गए, मोनेटाइजेशन चैलेंज बॉक्स में दिख रही संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ती रही।
कुछ ही घंटों में वीडियो ने 3 लाख से अधिक व्यूज हासिल कर लिए और फेसबुक द्वारा निर्धारित लक्ष्य पूरा हो गया।
लेकिन लक्ष्य पूरा होने के बावजूद पेज पर कंटेंट मोनेटाइजेशन सक्रिय नहीं हुआ।
स्थिति यह है कि संबंधित पेज पर व्यूज की संख्या अब 6 लाख 70 हजार से भी ऊपर पहुंच चुकी है, फिर भी मोनेटाइजेशन सुविधा उपलब्ध नहीं हुई है।
इसके बजाय फेसबुक ने “You Reached The Goal” का संदेश दिखाया। साथ ही यह जानकारी भी दी कि कंटेंट की समीक्षा की जाएगी और यदि वह सभी नीतियों एवं शर्तों पर खरा उतरता है तो अगस्त के अंत तक मोनेटाइजेशन देने या न देने पर फैसला लिया जाएगा।
खोज समाचार ने यह चैलेंज स्वीकार किए अभी दो दिन ही हुए हैं। फेसबुक के अनुसार यह चैलेंज 19 जून से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलना है, लेकिन लक्ष्य दो दिन में ही पूरा हो गया।
इसके बावजूद मोनेटाइजेशन नहीं मिला।
3 लाख व्यूज सिर्फ पहला पड़ाव हैं
इस परीक्षण से एक बात साफ हुई है कि 28 दिनों के भीतर 3 लाख व्यूज हासिल करना मोनेटाइजेशन मिलने की गारंटी नहीं है।
यह केवल उस प्रक्रिया में प्रवेश करने का एक आधार हो सकता है, जिसके बाद फेसबुक कंटेंट, पेज की स्थिति और अपने आंतरिक मानकों के आधार पर समीक्षा करता है।
संभव है कि अलग-अलग पेजों के लिए निर्णय का समय भी अलग हो।
इसलिए सोशल मीडिया पर फैल रहा यह दावा कि “3 लाख व्यूज पूरे होते ही मोनेटाइजेशन मिल जाता है”, फिलहाल सही साबित नहीं होता।
क्या सिर्फ वीडियो के व्यूज गिने जाते हैं?
परीक्षण के दौरान एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई।
अधिकांश लोग 3 लाख व्यूज का मतलब केवल वीडियो या रील्स के व्यूज समझते हैं। लेकिन फेसबुक के इस कंटेंट मोनेटाइजेशन चैलेंज में केवल वीडियो ही नहीं, बल्कि अन्य योग्य कंटेंट पर मिलने वाले व्यूज भी गिने जाते दिख रहे हैं।
इसमें शामिल हो सकते हैं:
- वीडियो
- रील्स
- फोटो पोस्ट
- स्टेटस पोस्ट
- अन्य योग्य कंटेंट
दरअसल, फेसबुक का कंटेंट मोनेटाइजेशन सिस्टम केवल वीडियो आधारित नहीं है। कई मामलों में फोटो, स्टेटस और अन्य फॉर्मेट पर मिलने वाले योग्य व्यूज भी अहम भूमिका निभाते हैं।
28 दिनों में 3 लाख व्यूज कैसे हासिल किए जा सकते हैं?
किसी भी क्रिएटर के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि उस समय कौन-सा विषय लोगों के बीच चर्चा में है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी राजनीतिक दल का राष्ट्रीय अधिवेशन, कोई बड़ा सामाजिक मुद्दा या कोई चर्चित सार्वजनिक कार्यक्रम ट्रेंड में है, तो उससे जुड़ा कंटेंट ज्यादा लोगों तक पहुंच सकता है।
जब बड़ी संख्या में लोग एक ही विषय पर पोस्ट करने लगते हैं तो फेसबुक का एल्गोरिदम उस विषय को ट्रेंडिंग श्रेणी में पहचानने लगता है।
इसके बाद वह संबंधित कंटेंट का विश्लेषण करता है और यह समझने की कोशिश करता है कि कौन-सी सामग्री उपयोगी, मौलिक और दर्शकों के लिए प्रासंगिक है।
यदि किसी यूजर ने किसी विशेष विषय से जुड़ा कंटेंट कुछ समय तक देखा है तो फेसबुक उसे उसी विषय के अन्य पोस्ट भी दिखाने लगता है।
यही वजह है कि ट्रेंडिंग विषयों पर मौलिक और समयानुकूल सामग्री बेहतर पहुंच हासिल कर सकती है।
फेसबुक आपके कंटेंट को कैसे समझता है?
फेसबुक का एआई और एल्गोरिदम वीडियो, फोटो और अन्य सामग्री का विश्लेषण करता है। हालांकि वह हर चीज को पूरी तरह नहीं समझ पाता।
लेकिन पोस्ट के साथ लिखा गया कैप्शन उसके लिए काफी महत्वपूर्ण संकेत होता है।
इसलिए यदि कंटेंट किसी ट्रेंडिंग विषय से जुड़ा है तो उससे संबंधित उपयुक्त कीवर्ड कैप्शन में शामिल करना मददगार हो सकता है।
हालांकि यहां सावधानी भी जरूरी है। अपमानजनक भाषा, हिंसा, नफरत फैलाने वाले शब्द या आपत्तिजनक अभिव्यक्तियां कंटेंट की पहुंच और मोनेटाइजेशन दोनों पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
दर्शकों को शुरुआत में ही रोकना जरूरी
सिर्फ पहुंच बढ़ जाना ही पर्याप्त नहीं है। दर्शक कंटेंट पर रुकें, यह उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
यदि वीडियो के शुरुआती कुछ सेकंड लंबी भूमिका में निकल जाते हैं तो कई लोग उसे छोड़ सकते हैं।
इसके बजाय मुख्य जानकारी शुरुआत में ही देने से दर्शकों के कुछ सेकंड तक रुकने की संभावना बढ़ जाती है।
जब यूजर 5 से 10 सेकंड या उससे अधिक समय तक कंटेंट देखता है तो फेसबुक इसे सकारात्मक संकेत के रूप में ले सकता है।
ट्रेंडिंग विषय, सही कैप्शन, मौलिक कंटेंट और प्रभावी प्रस्तुति का संयोजन व्यूज बढ़ाने में मदद कर सकता है।
लेकिन खोज समाचार के परीक्षण से अभी तक जो निष्कर्ष निकला है, वह स्पष्ट है—28 दिनों में 3 लाख व्यूज पूरा करना मोनेटाइजेशन का अंतिम चरण नहीं है। यह केवल समीक्षा प्रक्रिया तक पहुंचने का एक आधार है। अंतिम फैसला फेसबुक अपनी नीतियों और आंतरिक जांच के बाद ही करता है।