प्रधानमंत्री राहत कोष में फर्जी सहयोग दिखाने वाला युवक गिरफ्तार
बाढ़ पीड़ितों की मदद के नाम पर प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष में 1 लाख 20 हजार रुपये जमा करने का फर्जी विवरण सोशल मीडिया पर डालने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कथित सहयोग का विवरण साझा करने के साथ अपना निजी QR कोड भी पोस्ट किया था।
गिरफ्तार युवक की पहचान रामेछाप के गोकुलगंगा गांवपालिका-2, ठोसे निवासी 32 वर्षीय भगवान कार्की के रूप में हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
1.20 लाख रुपये देने का बनाया फर्जी स्टेटमेंट
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक कार्की ने ऐसा स्टेटमेंट तैयार किया था, जिससे लगे कि उन्होंने प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष में 1 लाख 20 हजार रुपये की मदद दी है। जांच में यह विवरण फर्जी पाया गया।
पुलिस के अनुसार, इस फर्जी स्टेटमेंट को तैयार करने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
मामले में एक और अहम बात सामने आई है। कथित तौर पर सरकारी राहत कोष में रकम जमा करने का विवरण पोस्ट करने के साथ कार्की ने अपना QR कोड भी सार्वजनिक किया था।
बाढ़ राहत के बीच सामने आया मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में भदौ 10 को आई बाढ़ के बाद प्रभावित लोगों के बचाव और राहत के लिए सहयोग जुटाया जा रहा है।
आपदा के समय सरकारी राहत कोष में बड़ी रकम देने का दावा लोगों का भरोसा हासिल कर सकता है। ऐसे में फर्जी भुगतान विवरण के साथ निजी QR कोड साझा करने से आम लोगों के भ्रमित होने और राहत के नाम पर गलत जगह पैसा भेजने का जोखिम भी पैदा होता है।
इसी पहलू को देखते हुए पुलिस अब यह पता लगा रही है कि फर्जी विवरण और QR कोड पोस्ट करने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
पैसे जुटाए गए या नहीं, इसकी भी जांच
कार्की को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है। अभी यह साफ नहीं हुआ है कि सोशल मीडिया पर डाले गए QR कोड के जरिए किसी व्यक्ति से रकम ली गई थी या नहीं।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी स्टेटमेंट केवल सरकारी राहत कोष में सहयोग देने का भ्रम पैदा करने के लिए बनाया गया था या इसके जरिए लोगों से पैसा जुटाने की भी कोशिश की गई थी।
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