गरिमा के माता-पिता काठमांडू रवाना, गृह मंत्री से होगी वार्ता

Hindi News Desk
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गरिमा के माता-पिता काठमांडू रवाना, गृह मंत्री से होगी वार्ता

बारा के सिमरा में तीन साल की गरिमा चौधरी की हत्या के बाद न्याय की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच उनके माता-पिता शनिवार को काठमांडू रवाना हुए। गरिमा के पिता मनोज चौधरी और मां मानमती चौधरी वहां गृह मंत्री सुधन गुरुङ से बातचीत करेंगे।

परिवार के साथ स्थानीय अभियंताओं समेत सात सदस्यीय टोली भी काठमांडू गई है। यह टोली गरिमा की हत्या की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परिवार को न्याय दिलाने से जुड़े मुद्दे सरकार के सामने रखेगी।

आंदोलन के बीच परिवार को काठमांडू ले जाया गया

शनिवार दोपहर मनोज और मानमती चौधरी सिमरा में जारी आंदोलन स्थल से काठमांडू के लिए निकले। इलाका प्रहरी कार्यालय सिमरा के पुलिस नायब उपरीक्षक दयाकृष्ण भट्ट उन्हें पुलिस की गाड़ी से सिमरा एयरपोर्ट तक लेकर गए।

एयरपोर्ट पर बोर्डिंग पास समेत यात्रा से जुड़ी व्यवस्था भी पुलिस की ओर से की गई थी।

काठमांडू जाने वाली टोली में स्थानीय अभियंता कपिल खरेल, सम्राट उपाध्याय और नवराज कार्की समेत अन्य लोग शामिल हैं।

परिवार और प्रतिनिधि मंडल की कोशिश है कि गृह मंत्री के सामने मामले की जांच को लेकर उठ रहे सवालों के साथ स्थानीय लोगों की मांगें भी सीधे रखी जाएं।

मनोज बोले- सिमरा में आंदोलन जारी रखें

काठमांडू रवाना होने से पहले गरिमा के पिता मनोज चौधरी ने स्थानीय लोगों से आंदोलन जारी रखने की अपील की।

उनका कहना था कि परिवार सरकार से बातचीत के लिए राजधानी जा रहा है, लेकिन इससे गरिमा के लिए न्याय की मांग कमजोर नहीं पड़नी चाहिए। सिमरा में दबाव बनाने वाला आंदोलन जारी रहना जरूरी है।

गरिमा की मौत के बाद से इलाके में लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ा है। परिवार और स्थानीय लोग घटना में शामिल लोगों को कानूनी दायरे में लाने और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

काठमांडू ले जाने के तरीके पर भी नाराजगी

इस बीच परिवार को काठमांडू ले जाने की तैयारी को लेकर आंदोलन में शामिल कुछ स्थानीय लोगों ने असंतोष जताया है।

उनका आरोप है कि पुलिस और कुछ अभियंताओं ने काठमांडू में वार्ता की योजना के बारे में आंदोलनरत लोगों को पहले से पूरी जानकारी नहीं दी। इसी नाराजगी के बीच सिमरा एयरपोर्ट के बाहर कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की।

लोगों का कहना है कि गरिमा के लिए शुरू हुआ आंदोलन केवल परिवार का नहीं, बल्कि पूरे इलाके का मुद्दा बन चुका है। ऐसे में सरकार से होने वाली बातचीत और उसमें उठने वाले मुद्दों की जानकारी आंदोलनरत पक्ष को भी होनी चाहिए।

अब सरकार के रुख पर नजर

तीन साल की गरिमा चौधरी की हत्या ने सिमरा में सुरक्षा और जांच व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। घटना के बाद से स्थानीय लोग लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।

अब नजर काठमांडू में होने वाली बातचीत पर है। गृह मंत्री के साथ बैठक में सरकार जांच और कार्रवाई को लेकर क्या भरोसा देती है, यह आंदोलन की आगे की दिशा के लिए भी अहम होगा।

परिवार काठमांडू पहुंच गया है, लेकिन सिमरा में गरिमा के लिए न्याय की मांग अभी थमी नहीं है।

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