जेन-जी शहीद परिवार और घायलों की मांगों पर सरकार की पहल

Hindi News Desk
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जेन-जी शहीद परिवार और घायलों की मांगों पर सरकार की पहल

जेन-जी आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिवार और घायलों की मांगों को लागू करने के लिए सरकार ने अब एक ही तंत्र के जरिए काम आगे बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय के तहत पहले से बनी सहजीकरण समिति को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। कोशिश है कि पहले हो चुके समझौते सिर्फ सरकारी कागजों में न रहें और उन पर अमल तेज हो।

सोमवार को गृह मंत्रालय में गृहमंत्री सुधन गुरुङ की अगुवाई में हुई बैठक में इसी बात पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई। मंत्री, सांसद, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शहीद परिवार और घायलों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए।

कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों की मंत्री सोविता गौतम, प्रतिनिधिसभा के सदस्य, मुख्य सचिव और गृह सचिव भी चर्चा में मौजूद थे।

पहले हुए समझौतों की हुई समीक्षा

जेन-जी आंदोलन 2082 भदौ 23 और 24 गते हुआ था। आंदोलन के बाद शहीद परिवारों और घायलों की मांगों को लेकर सरकार के साथ अलग-अलग चरण में समझौते और फैसले हुए, लेकिन अब सवाल उनके अमल का है।

बैठक में 2082 मंसिर 24 गते मंत्रिपरिषद से मंजूर 10 सूत्रीय समझौते की प्रगति देखी गई। इसके साथ ही 2083 असार 18 गते स्वीकृत 24 सूत्रीय प्रस्ताव कहां तक लागू हुआ, इसकी भी समीक्षा की गई।

सरकार ने अब इन मांगों को अलग-अलग मंत्रालय और दफ्तरों के बीच उलझने देने के बजाय एक जगह से समन्वय करने की व्यवस्था बनाई है।

प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय के तहत सहसचिव की अध्यक्षता वाली सहजीकरण समिति जेन-जी से जुड़े मामलों पर खास तौर पर काम करेगी। अलग-अलग सरकारी निकायों से जुड़ी मांगों पर यही समिति समन्वय करेगी और उनके कार्यान्वयन को आगे बढ़ाएगी।

शहीद परिवारों और घायलों के लिए सिंहदरबार पहुंच आसान होगी

बैठक में एक व्यावहारिक परेशानी भी सामने आई। अपनी मांगों और सरकारी काम के सिलसिले में संबंधित कार्यालयों तक पहुंचने में शहीद परिवारों और घायलों को दिक्कत होती रही है।

इसे देखते हुए सिंहदरबार में उनके प्रवेश के लिए जरूरी सहजीकरण करने का फैसला हुआ है। आंदोलन से सीधे प्रभावित परिवारों के लिए यह मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है।

जेन-जी परिषद और शहीद दिवस पर भी चर्चा

बैठक केवल पुराने समझौतों की समीक्षा तक सीमित नहीं रही। आंदोलन से जुड़े कुछ नए और लंबित प्रस्ताव भी चर्चा में आए।

जेन-जी परिषद की घोषणा और जेन-जी शहीद दिवस घोषित करने के प्रस्ताव पर बात हुई। दौलत थापा को ‘जीवित शहीद’ घोषित करने का विषय भी बैठक में रखा गया।

इसके अलावा पहले स्वीकृत 24 सूत्रीय प्रस्ताव में संशोधन, संसद भवन परिसर में जेन-जी की प्रतिमा बनाने और जेन-जी पार्क स्थापित करने के विषय पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

हालांकि इन सभी प्रस्तावों को एक साथ तत्काल लागू करने के बजाय जरूरी सरकारी प्रक्रिया पूरी करते हुए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर समझ बनी है।

अब नजर फैसलों के अमल पर

बैठक में शामिल पक्षों ने जेन-जी आंदोलन से जुड़ी बाकी मांगों को जल्द संबोधित करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। जनप्रतिनिधियों और संबंधित सरकारी निकायों के बीच एक साझा समझ बनाकर आगे बढ़ने पर भी जोर दिया गया।

सरकार ने अब जिम्मेदारी एक समर्पित तंत्र को सौंप दी है। इससे अलग-अलग निकायों में अटके विषयों को एक जगह से आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।

लेकिन शहीद परिवारों और घायलों के लिए असली सवाल अब भी वही है—पहले से मंजूर समझौते और सरकारी फैसले जमीन पर कितनी जल्दी उतरते हैं। उनके लिए सरकारी प्रतिबद्धता का मतलब तभी होगा, जब उसका असर रोजमर्रा की मुश्किलों और लंबित मांगों के समाधान में दिखाई दे।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।