नागढुंगा सुरंग विवाद पर ज्ञानेन्द्र शाही की टिप्पणी

Hindi News Desk
Hindi News Desk
Read this article also in : English
नागढुंगा सुरंग विवाद पर ज्ञानेन्द्र शाही की टिप्पणी

नागढुंगा सुरंग मार्ग के नामकरण को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के नेता ज्ञानेन्द्र शाही की एक फेसबुक पोस्ट ने नया राजनीतिक विमर्श खड़ा कर दिया है। शाही ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का नाम हटाए जाने की चर्चाओं का जिक्र करते हुए इतिहास, सार्वजनिक संपत्तियों और नाम बदलने की राजनीति पर सवाल उठाए हैं।

अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा कि जब भी कोई राजनीतिक शक्ति इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार बदलने की कोशिश करती है, तो समय के साथ उसके अलग परिणाम भी सामने आते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने राजतंत्र काल से जुड़े कई सार्वजनिक ढांचों, सड़कों और स्थानों के नाम बदले जाने की पुरानी घटनाओं को याद किया।

शाही का कहना है कि इतिहास किसी एक व्यक्ति, दल या व्यवस्था की संपत्ति नहीं होता। यह पूरे देश की साझा स्मृति है। इसलिए राजनीतिक नजरिए के आधार पर इतिहास को मिटाने या नए सिरे से लिखने की कोशिश लंबे समय में उचित नहीं मानी जा सकती। पोस्ट के आखिर में उन्होंने एक पुरानी कहानी का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि मौजूदा घटनाक्रम से सीख लेने की जरूरत है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

शाही की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके तर्क का समर्थन किया, जबकि कई लोगों का कहना है कि इतिहास, सार्वजनिक परियोजनाओं का नामकरण और राजनीतिक फैसलों को अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए।

आधिकारिक जानकारी का इंतजार जरूरी

इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि नागढुंगा सुरंग मार्ग के नामकरण या पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का नाम हटाए जाने से जुड़े दावों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित सरकारी निकाय की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं या दावों को अपने आप तथ्य नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में सरकार या संबंधित संस्था की आधिकारिक घोषणा को ही आधार बनाया जाना चाहिए।

नाम बदलने पर बहस नई नहीं

नेपाल में राजनीतिक बदलावों के साथ सार्वजनिक संस्थानों, परियोजनाओं और संरचनाओं के नाम बदलने का मुद्दा पहले भी कई बार चर्चा का विषय बन चुका है। नागढुंगा सुरंग मार्ग को लेकर उठा ताजा विवाद भी उसी लंबे राजनीतिक और ऐतिहासिक विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें इतिहास, सार्वजनिक स्मृति और सरकारी परिसंपत्तियों के नामकरण को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।

DISCLAIMER
DISCLAIMER +

यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।