राप्रपा का निर्देश न मानने पर उद्धव थापा पार्टी से बाहर
बागमती प्रदेशसभा में नेकपा एमाले को समर्थन देने का मामला राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के भीतर बड़ी कार्रवाई तक पहुंच गया है। पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर एमाले के पक्ष में समर्थन पत्र देने वाले प्रदेशसभा सदस्य उद्धव थापा को राप्रपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
गुरुवार को हुई राप्रपा की कार्यसम्पादन समिति की बैठक में थापा पर कार्रवाई का फैसला लिया गया। पार्टी अध्यक्ष राजेंद्र लिङ्देन के मुताबिक, अब थापा राप्रपा के साधारण सदस्य भी नहीं रहेंगे।
एमाले को समर्थन देने का पार्टी ने नहीं लिया था फैसला
विवाद बागमती प्रदेशसभा में एमाले को समर्थन देने से जुड़ा है। राप्रपा का कहना है कि पार्टी ने एमाले के पक्ष में जाने या उसे समर्थन देने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं किया था।
इसके बावजूद थापा ने एमाले के समर्थन में पत्र सौंप दिया। पार्टी नेतृत्व ने इसे व्यक्तिगत कदम नहीं, बल्कि पार्टी की आधिकारिक लाइन और निर्देश का उल्लंघन माना।
मामला सामने आने के बाद राप्रपा के भीतर इस पर अनुशासन की प्रक्रिया शुरू हुई। थापा से जवाब भी मांगा गया।
स्पष्टीकरण नहीं आया, समर्थन पत्र भी वापस नहीं लिया
राप्रपा के अनुसार, अनुशासन समिति ने थापा को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था। तय समय के भीतर उनकी ओर से स्पष्टीकरण नहीं आया।
पार्टी की आपत्ति सिर्फ इतनी नहीं थी। एमाले को समर्थन देने के लिए सौंपा गया पत्र भी वापस नहीं लिया गया।
अध्यक्ष लिङ्देन का कहना है कि थापा को पार्टी के निर्देश के खिलाफ उठाए गए कदम को सुधारने का अवसर दिया गया था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद कार्यसम्पादन समिति ने उन्हें पार्टी से हटाने का फैसला किया।
प्रदेशसभा के फैसले पर पार्टी ने दिखाई सख्ती
इस कार्रवाई के बाद थापा की राप्रपा की साधारण सदस्यता भी खत्म हो गई है।
बागमती प्रदेशसभा में शुरू हुआ यह विवाद पार्टी के आधिकारिक फैसले और एक सांसद के अपने स्तर पर उठाए गए कदम के बीच टकराव का मामला बन गया था। राप्रपा नेतृत्व ने आखिरकार इसे अनुशासन का सवाल मानते हुए निष्कासन तक की कार्रवाई की।
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