नेपाली कांग्रेस का 15वां महाधिवेशन रोकने अदालत जाएगा गुट
नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन को लेकर पार्टी के भीतर चल रहा विवाद अब अदालत पहुंचने की तैयारी में है। संस्थापन से अलग खड़े नेताओं के समूह ने महाधिवेशन की मौजूदा प्रक्रिया रोकने की मांग के साथ अदालत में निवेदन देने का फैसला किया है। तैयारी शुक्रवार तक निवेदन दर्ता करने की है।
गुरुवार को काठमांडू के महाराजगंज स्थित डॉ. शशांक कोइराला के निवास पर समूह के शीर्ष नेताओं की बैठक हुई। बैठक में पार्टी की आधिकारिकता से जुड़ा मामला फिर न्यायिक सुनवाई में जाने की स्थिति बनने के बाद कानूनी रास्ता अपनाने पर सहमति बनी।
समूह का कहना है कि आधिकारिकता से जुड़े विवाद पर अदालत से फैसला आने से पहले महाधिवेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाना ठीक नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत से जारी संगठनात्मक प्रक्रिया रोकने की मांग की जाएगी।
शुक्रवार तक अदालत जाने की तैयारी
संस्थापन इतर समूह की प्रचार-प्रसार समिति के संयोजक मीन विश्वकर्मा के मुताबिक कानूनी प्रक्रिया तत्काल शुरू की जा रही है।
विश्वकर्मा ने कहा, “जितनी जल्दी हो सके, महाधिवेशन रोकने की मांग के साथ अदालत में निवेदन देने का फैसला हुआ है। शुक्रवार तक निवेदन दर्ता हो जाएगा।”
इस कदम के बाद कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान अब केवल पार्टी संगठन तक सीमित नहीं रहेगी। महाधिवेशन की प्रक्रिया जारी रहेगी या बीच में कानूनी अड़चन आएगी, यह अदालत में होने वाली अगली कार्यवाही पर भी निर्भर करेगा।
वडा अधिवेशन 24 भदौ को
दूसरी ओर नेपाली कांग्रेस ने 15वें महाधिवेशन की तैयारी रोकने के संकेत नहीं दिए हैं। केंद्रीय निर्वाचन समिति के ताजा फैसले के मुताबिक वडा अधिवेशन 24 भदौ को कराने की तैयारी है।
निचले स्तर के अधिवेशनों के कार्यक्रम में बदलाव जरूर किया गया है, लेकिन केंद्रीय महाधिवेशन की तारीख फिलहाल वही रखी गई है।
पार्टी ने 15वां महाधिवेशन काठमांडू में 16 से 19 असोज तक कराने का कार्यक्रम तय किया है। इस तारीख में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अब नजर अदालत की प्रक्रिया पर रहेगी। संस्थापन इतर समूह का निवेदन दर्ता होने के बाद यह साफ होगा कि कांग्रेस अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक महाधिवेशन की ओर बढ़ पाएगी या पार्टी के आंतरिक विवाद के कारण चुनावी और संगठनात्मक कार्यक्रम पर कानूनी रोक का सवाल खड़ा होगा।
DISCLAIMER
यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।