किराया न चुकाने पर 21 उद्योगों की बिजली बंद
सरकारी भवन और गोदाम इस्तेमाल कर लंबे समय से किराया नहीं चुका रहे उद्योगों पर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। सात दिन के भीतर बकाया जमा नहीं करने पर बिजली और पानी की सेवा रोकने की चेतावनी के बाद कई उद्योगों ने भुगतान शुरू कर दिया है।
उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय के मुताबिक, सिर्फ एक दिन में 56 लाख 60 हजार 923 रुपये 37 पैसे की वसूली हुई है। इसके साथ ही सरकारी खाते में अब तक जमा बकाया किराये की कुल रकम 46 करोड़ 73 लाख 11 हजार 964 रुपये 52 पैसे पहुंच गई है।
यह कार्रवाई उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री गौरी यादव के निर्देश पर तेज की गई है। मंत्रालय का कहना है कि कई बार मौखिक आग्रह और नियमित पत्र भेजने के बाद भी कंपनियों ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद बिजली-पानी काटने का फैसला लिया गया।
बकाया चुकाने वाले पांच उद्योगों की बिजली दोबारा जोड़ दी गई है। वहीं, भुगतान नहीं करने वाले 21 उद्योगों की बिजली अब भी बंद है।
सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल पर बढ़ी जवाबदेही
मंत्रालय का कहना है कि सरकारी संरचना, भवन और गोदाम का व्यावसायिक इस्तेमाल करने के बावजूद कई उद्योग वर्षों तक किराया नहीं चुका रहे थे। इससे सरकारी राजस्व पर असर पड़ रहा था।
पहले मंत्रालय ने बातचीत और पत्राचार के जरिए रकम उठाने की कोशिश की। लेकिन अपेक्षित भुगतान नहीं होने पर सेवा कटौती की कार्रवाई शुरू की गई।
मंत्रालय ने साफ किया है कि बकाया जमा करने वाले उद्योगों की सेवाएं फिर से चालू कर दी जाएंगी। आदेश नहीं मानने वाली कंपनियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
कन्टिनेन्टल समूह की दो कंपनियों पर बड़ी देनदारी
आर्थिक वर्ष 2075/76 से अब तक के रिकॉर्ड में, जुर्माने को छोड़कर सबसे ज्यादा किराया कन्टिनेन्टल समूह की दो कंपनियों पर बकाया है।
कन्टिनेन्टल कम्पोनेन्ट एन्ड सर्भिसेज प्रालि को 3 करोड़ 75 लाख 36 हजार 450 रुपये 78 पैसे चुकाने हैं। वहीं, कन्टिनेन्टल सर्भिसेज प्रालि पर 1 करोड़ 1 लाख 53 हजार 411 रुपये 17 पैसे का बकाया है।
मंत्रालय से जुड़े स्रोतों का दावा है कि दोनों कंपनियां बकाया जमा किए बिना ही गोदाम चला रही हैं। निर्देश का पालन नहीं करने पर इनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर मंत्रालय के भीतर सलाह-मशविरा शुरू हो गया है।
लंबे समय से रुकी किराया वसूली दोबारा शुरू होने को मंत्रालय राजस्व अनुशासन से जोड़कर देख रहा है। इस कदम से सरकारी संपत्ति का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाली दूसरी कंपनियों पर भी समय से भुगतान करने का दबाव बढ़ा है।
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