गणेश नेपाली मामले पर कुलमान घिसिङ ने उठाए सवाल

Hindi News Desk
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गणेश नेपाली मामले पर कुलमान घिसिङ ने उठाए सवाल

काठमांडू के त्रिपुरेश्वर में राइड-शेयरिंग सेवा चलाकर गुजारा करने वाले गणेश नेपाली के आत्मदाह की कोशिश के बाद उज्यालो नेपाल पार्टी के अध्यक्ष कुलमान घिसिङ ने राज्य के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह घटना सिर्फ एक युवक के गुस्से या आवेग की कहानी नहीं है। इसके पीछे बेरोजगारी, आर्थिक दबाव और सरकारी निकायों के व्यवहार से पैदा हो रही गहरी निराशा भी जुड़ी है।

25 वर्षीय गणेश ने गुरुवार को त्रिपुरेश्वर स्थित पासपोर्ट विभाग के सामने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की थी। इससे पहले काठमांडू महानगरपालिका की नगर पुलिस ने वहां खड़ी उनकी मोटरसाइकिल पर व्हील लॉक लगा दिया था।

गणेश गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है।

‘कानून लागू हो, लेकिन इंसानियत न खोए’

शुक्रवार को सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए घिसिङ ने गणेश को नेपाली समाज में बढ़ती निराशा और गुस्से का प्रतिनिधि चेहरा बताया।

उन्होंने कहा कि देश में रोजगार के पर्याप्त मौके नहीं हैं। बड़ी संख्या में युवा राइड-शेयरिंग, फुटपाथ कारोबार और दूसरे अनौपचारिक कामों के सहारे अपना जीवन चला रहे हैं। ऐसे लोगों के साथ सरकारी निकायों का कठोर व्यवहार उन्हें और हताश कर सकता है।

घिसिङ ने सवाल उठाया कि क्या राज्य का काम केवल कानून लागू करना है, या नागरिकों के जीवन, सम्मान और मानवीय संवेदना की रक्षा करना भी उसकी जिम्मेदारी है।

उनके मुताबिक कानून जरूरी है, लेकिन उसे लागू करते समय इंसानियत खत्म नहीं होनी चाहिए। रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किसी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

गरीबों को हटाने से पहले विकल्प देने की मांग

घिसिङ ने बागमती नदी किनारे बसे अव्यवस्थित परिवारों को हटाने के दौरान हुई इंद्रबहादुर राई की मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिना लंबी योजना, पुनर्वास और सम्मानजनक विकल्प के लोगों को हटाने की कोशिश गंभीर मानवीय दुर्घटनाओं को जन्म दे सकती है।

होल्डिंग सेंटर में रखे गए परिवारों को भी उचित वैकल्पिक व्यवस्था के बिना हटाने की कोशिश की खबरों पर उन्होंने चिंता जताई।

घिसिङ के अनुसार गणेश नेपाली की घटना और नदी किनारे की बस्तियों को हटाने का मामला ऊपर से अलग दिख सकता है। लेकिन दोनों जगह एक ही सवाल खड़ा होता है—सरकारी नीति और कार्रवाई में इंसान की जगह कहां है?

उन्होंने सरकार, स्थानीय निकायों और संबंधित संस्थाओं से कहा कि कोई भी कठोर फैसला लेने से पहले यह देखा जाना चाहिए कि उसका असर नागरिकों के जीवन पर क्या पड़ेगा।

दंड से ज्यादा संवाद की जरूरत

घिसिङ ने कहा कि स्थायी समाधान बल प्रयोग और सजा से नहीं निकलेगा। इसके लिए संवाद, सहयोग, संवेदनशील व्यवहार और सम्मानजनक विकल्प जरूरी हैं।

उनका कहना है कि किसी सरकारी अभियान की सफलता नागरिकों के आंसू, पीड़ा या जीवन की कीमत पर नहीं मापी जानी चाहिए।

इसी बीच गणेश नेपाली के लिए न्याय की मांग करते हुए शुक्रवार को माइतीघर में प्रदर्शन भी हुआ। प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगार और स्वरोजगार युवाओं के साथ होने वाले अपमानजनक व्यवहार को रोकने की मांग की।

उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई की भी मांग उठाई।

कुलमान घिसिङ ने गंभीर रूप से घायल गणेश नेपाली के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।