रसुवागढ़ी पावर हाउस के कर्मचारियों को बचाने की कुलमान की अपील
रसुवागढ़ी के भूमिगत पावर हाउस में कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका के बीच कुलमान घिसिंग ने खोज और बचाव का काम सीधे पावर हाउस तक पहुंचाकर करने पर जोर दिया है। नेपाली सेना की टीम पहुंच सुरंग के भीतर करीब 250 मीटर तक गई थी, लेकिन वहां कोई कर्मचारी नहीं मिला।
घिसिंग का कहना है कि इतने हिस्से में किसी के नहीं मिलने से तलाश खत्म नहीं होनी चाहिए। पावर हाउस में काम करने वाले कर्मचारी आम तौर पर भूमिगत कंट्रोल रूम में रहते हैं। ऐसे में अब सबसे जरूरी है कि किसी भी सुरक्षित तरीके से भीतर तक पहुंचकर उनकी स्थिति का पता लगाया जाए।
सेना की टीम 250 मीटर भीतर तक पहुंची
घिसिंग के मुताबिक, भदौ 15 को नेपाली सेना की टीम रसुवागढ़ी पावर हाउस की ओर जाने वाली पहुंच सुरंग में दाखिल हुई। टीम करीब 250 मीटर अंदर तक पहुंची, लेकिन उस हिस्से में किसी व्यक्ति के मिलने की खबर नहीं आई।
अब चिंता पावर हाउस के अंदरूनी हिस्से को लेकर है। वहां तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं दिख रहा है और सुरंग के भीतर की स्थिति भी बचाव अभियान को मुश्किल बना रही है।
घिसिंग ने कहा है कि कर्मचारियों के कंट्रोल रूम में होने की संभावना को ध्यान में रखकर आगे की तलाश होनी चाहिए। इसके लिए पावर हाउस तक पहुंचने का जो भी सुरक्षित और संभव रास्ता हो, उस पर काम करने की जरूरत है।
घिसिंग ने एक दिन पहले किया था इलाके का जायजा
घिसिंग ने फेसबुक पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की है। उनके मुताबिक, भदौ 14 को वह खुद टिमुरे क्षेत्र पहुंचे थे। उन्होंने रसुवागढ़ी और चिलिमे के सुरंग क्षेत्रों का भी जायजा लिया।
वहां से लौटने के बाद धुंचे में सुरक्षा निकायों के साथ खोज और बचाव अभियान को लेकर चर्चा हुई। इसके अगले दिन सेना की टीम पहुंच सुरंग के भीतर गई।
अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि बचाव दल भूमिगत पावर हाउस के उस हिस्से तक कैसे पहुंचे, जहां कर्मचारी मौजूद हो सकते हैं।
कंट्रोल रूम तक पहुंचना अहम
भूमिगत पावर हाउस में ड्यूटी पर रहने वाले कर्मचारी सामान्य तौर पर कंट्रोल रूम में होते हैं। इसी वजह से घिसिंग ने शुरुआती सुरंग में किसी के नहीं मिलने के बाद भी अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई है।
उन्होंने फंसे कर्मचारियों की स्थिति जल्द से जल्द पता लगाने और तत्काल बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह साफ नहीं है कि पावर हाउस के भीतर कितने कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में भी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। बचाव दल को पावर हाउस तक पहुंचने के लिए अभी कितनी दूरी तय करनी है, इसका भी विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया है।
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