राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रवक्ता और धनुषा-3 से प्रतिनिधि सभा सदस्य मनीष झा ने काठमांडू में मीडिया संस्थानों समेत कई अहम जगहों के प्रवेश द्वार पर गाड़ियां खड़ी कर रास्ता रोकने की घटना पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
झा ने कहा है कि इस मामले में जो भी शामिल हो, उसकी पहचान कर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषी पाए जाने पर कानून के मुताबिक कार्रवाई भी की जाए।
मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि कान्तिपुर पब्लिकेशंस के बाहर मिली एक गाड़ी का इस्तेमाल रास्वपा नेता रवि जायसवाल करते रहे हैं। हालांकि अब तक ऐसा कोई सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है, जिससे यह साबित हो कि गाड़ी जायसवाल, रास्वपा या किसी दूसरे पक्ष के निर्देश पर वहां खड़ी की गई थी।
एक ही सुबह पांच जगहों के बाहर मिलीं गाड़ियां
29 असार की सुबह काठमांडू में तीन मीडिया संस्थानों के प्रवेश द्वार के पास गाड़ियां खड़ी मिली थीं। इनमें कान्तिपुर पब्लिकेशंस, ऑनलाइनखबर और हिमालय टेलीविजन शामिल हैं।
इसी तरह भाटभटेनी सुपरमार्केट और नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन थापा के घर के बाहर भी रास्ता रुकने की स्थिति में गाड़ियां छोड़ी गई थीं।
पुलिस ने पांचों गाड़ियों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
एक ही सुबह अलग-अलग संवेदनशील जगहों पर इस तरह गाड़ियां मिलने से कई सवाल उठे हैं। क्या यह सिर्फ गलत पार्किंग का मामला था या किसी योजना के तहत प्रवेश रोकने और दबाव का माहौल बनाने की कोशिश की गई थी, पुलिस अभी इसकी जांच कर रही है।
‘जो भी शामिल है, उस पर कार्रवाई हो’
मनीष झा ने फेसबुक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “संचार संस्थानों और दूसरी जगहों पर गाड़ी रखकर अवरोध करना गलत है। इसमें जो भी शामिल है, जांच और कार्रवाई होनी चाहिए।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब घटनास्थल से मिली एक गाड़ी का संबंध उनकी ही पार्टी के एक नेता के इस्तेमाल से जुड़ा सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक कान्तिपुर पब्लिकेशंस के प्रवेश द्वार के बाहर मिली गाड़ी ज्योति कन्सर्न के नाम पर दर्ज है। उस गाड़ी को रवि जायसवाल ने बुक किया था और वह उसका इस्तेमाल करते आ रहे थे।
लेकिन गाड़ी वहां कौन लेकर गया, किसके कहने पर छोड़ी गई और उसे प्रवेश द्वार के सामने ही क्यों खड़ा किया गया, इन सवालों का जवाब अभी नहीं मिला है।
यह भी साफ नहीं है कि पांच अलग-अलग जगहों पर मिली गाड़ियों के बीच कोई सीधा संबंध था या सभी घटनाएं अलग-अलग हुईं।
अपनी पार्टी से जुड़े नाम पर भी बचाव नहीं
झा ने अपने बयान में किसी का बचाव नहीं किया। उन्होंने साफ कहा कि संलिप्तता किसी की भी हो, जांच होनी चाहिए।
उनकी प्रतिक्रिया को इस मायने में भी अहम माना जा रहा है कि मामले में रास्वपा से जुड़े एक नेता का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक दबाव या संरक्षण की आशंका पर भी चर्चा शुरू हो गई थी।
फिलहाल पुलिस ने रवि जायसवाल या रास्वपा की ओर से गाड़ी वहां रखवाए जाने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है।
राज्य की भूमिका पर भी उठाया सवाल
मनीष झा ने इस घटना को नागरिकों की सुरक्षा और भरोसे से भी जोड़ा है।
उन्होंने लिखा, “राज्य का काम नागरिकों की चिंता दूर करना है। राज्य खुद लोगों को और आतंकित करने का काम नहीं कर सकता।”
झा ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या इस तरह के बचकानेपन से शासन चलता है?”
उन्होंने जेन-जी आंदोलन के दौरान हुए बलिदान का भी जिक्र किया। झा ने सवाल किया कि क्या बदलाव के लिए हुई कुर्बानी के बाद भी राज्य व्यवस्था में इसी तरह के गलत और स्तरहीन प्रयोग किए जाएंगे।
मीडिया संस्थानों, एक बड़े कारोबारी प्रतिष्ठान और प्रमुख विपक्षी नेता के घर के बाहर एक ही दिन गाड़ियां छोड़ने की घटना को सामान्य लापरवाही मानना आसान नहीं है। अब पुलिस जांच से ही साफ होगा कि यह संयोग था, किसी व्यक्ति की मनमानी या फिर सोच-समझकर किया गया अवरोध।