खरिपाटी पहुंचे मंत्री, सुकुमबासी परिवारों का हाल जाना

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कीर्तिपुर का होल्डिंग सेंटर डूबने के बाद भक्तपुर के खरिपाटी में रखे गए सुकुमबासी परिवारों की स्थिति जानने सरकार के कई मंत्री मौके पर पहुंचे। टीम ने अस्थायी ठिकानों में रह रहे परिवारों से बातचीत की और उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के बारे में जानकारी ली।

मंत्रियों ने खरिपाटी के साथ बोडे क्षेत्र में बने होल्डिंग सेंटर का भी निरीक्षण किया। इस दौरान रहने की जगह, सुरक्षा, खाने-पीने की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति देखी गई।

परिवारों से सीधे सुनीं उनकी दिक्कतें

गृहमंत्री सुधन गुरुङ के नेतृत्व में पहुंची टीम में सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोख्रेल भी शामिल थे। भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामलों एवं सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल और महिला, बालबालिका, लैंगिक एवं यौनिक अल्पसंख्यक तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्री सीता वादी ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।

स्वास्थ्य एवं खाद्य स्वच्छता मंत्री निशा मेहता और युवा, श्रम तथा रोजगार मंत्री रामजी यादव ने भी होल्डिंग सेंटर की व्यवस्था का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान परिवारों ने अस्थायी ठिकानों में आ रही परेशानियां मंत्रियों के सामने रखीं। बातचीत सिर्फ मौजूदा सुविधाओं तक सीमित नहीं रही। लोगों ने यह भी पूछा कि उन्हें कब तक यहां रहना होगा और स्थायी बसोबास के लिए सरकार की योजना क्या है।

गृहमंत्री के सचिवालय के मुताबिक, परिवारों को तत्काल किए जा सकने वाले कामों और आगे की सरकारी तैयारी के बारे में जानकारी दी गई। सरकार ने कहा है कि फिलहाल जरूरी सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ पुनर्वास की लंबी योजना पर भी काम हो रहा है।

जमीन का प्रमाणपत्र प्रक्रिया पूरी होने के बाद

भूमि व्यवस्था मंत्री प्रतिभा रावल ने साफ किया कि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी को जमीन का मालिकाना प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा। उनके मुताबिक, सरकार ऐसा तरीका अपनाना चाहती है जिस पर बाद में विवाद या सवाल न उठें।

रावल ने कहा कि सुकुमबासी समस्या का समाधान जल्दबाजी में नहीं किया जा सकता। पहले वास्तविक भूमिहीन और अव्यवस्थित बस्तियों में रहने वाले परिवारों की सही पहचान जरूरी है। इसके बाद ही पुनर्वास और जमीन से जुड़े फैसले आगे बढ़ाए जाएंगे।

उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल न करने की अपील भी की। उनका कहना था कि गलत पहचान या दबाव में लिए गए फैसले से असली भूमिहीन परिवार पीछे छूट सकते हैं।

कीर्तिपुर का होल्डिंग सेंटर डूबने के बाद वहां रह रहे परिवारों को खरिपाटी स्थानांतरित किया गया था। अचानक हुए इस बदलाव के बाद उनके रहने, सुरक्षा और बुनियादी सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ी थी।

सरकार ने कहा है कि तत्काल राहत के साथ असली भूमिहीन परिवारों की पहचान, उनका पुनर्वास और जमीन का मालिकाना प्रमाणपत्र देने तक के मुद्दों को एक साथ रखकर समाधान खोजा जाएगा। फिलहाल खरिपाटी में रह रहे परिवारों की नजर इस बात पर है कि निरीक्षण के बाद जमीन पर क्या बदलाव दिखाई देता है।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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