नेपाल की उड़ानों पर ईयू की रोक हटाने की मांग

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यूरोपीय संघ (ईयू) की हवाई सुरक्षा सूची में नेपाल का नाम लगातार बने रहने को लेकर संसद में फिर चिंता जताई गई है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) की सांसद लिमा अधिकारी ने सरकार से इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और ईयू के साथ गंभीर स्तर पर पहल करने की मांग की।

प्रतिनिधि सभा की गुरुवार की बैठक में शून्यकाल के दौरान बोलते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल वर्ष 2013 से ईयू की हवाई सुरक्षा सूची में शामिल है। इसका असर सिर्फ विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय साख, पर्यटन और विदेशी निवेश पर भी पड़ रहा है।

अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2026 तक भी नेपाल की राष्ट्रीय ध्वजवाहक एयरलाइंस यूरोपीय देशों के लिए नियमित उड़ान शुरू नहीं कर सकी हैं। उनके मुताबिक यह स्थिति बताती है कि अब तक किए गए सुधार अपेक्षित नतीजे नहीं दे पाए हैं।

सिर्फ सुधार नहीं, नतीजे भी दिखने चाहिए

सांसद ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विमानन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कानूनी, नीतिगत और संस्थागत स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं। लेकिन इन प्रयासों का भरोसेमंद असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सुधार की प्रक्रिया को परिणाम तक पहुंचाया जाए और ईयू के साथ उच्चस्तरीय कूटनीतिक पहल आगे बढ़ाई जाए, ताकि नेपाल को हवाई सुरक्षा सूची से बाहर लाने का रास्ता साफ हो सके।

तकनीकी तैयारी और संस्थागत सुधार पर जोर

लिमा अधिकारी ने कहा कि आवश्यक तकनीकी प्रतिवेदन समय पर प्रस्तुत करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि नेपाल के प्रति अंतरराष्ट्रीय विश्वास मजबूत हो।

इसके साथ ही उन्होंने नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण में संस्थागत और नीतिगत सुधार को और प्रभावी बनाने, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हवाई सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा आधुनिक तकनीक और दक्ष जनशक्ति में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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