संसद में फिर गूंजा कुलमान घिसिङ का नाम, बिजली व्यवस्था पर सरकार घिरी

Hindi News Desk
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संसद में फिर गूंजा कुलमान घिसिङ का नाम, बिजली व्यवस्था पर सरकार घिरी

नेपाल की प्रतिनिधि सभा की बैठक में सोमवार को बिजली व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा। खास बात यह रही कि पूर्व कार्यकारी निर्देशक कुलमान घिसिङ का नाम विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के झापा–3 से सांसद प्रकाश पाठक ने उठाया। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार सामने आ रही बिजली संबंधी समस्याओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया।

नेपाल में एक समय ऐसा था जब लोगों को रोज 18 से 22 घंटे तक लोडशेडिंग झेलनी पड़ती थी। उसी दौर के बाद कुलमान घिसिङ के नेतृत्व में नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने लगातार कई वर्षों तक काम करते हुए देश को लोडशेडिंग से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई। आज भी उनके कार्यकाल को इसी उपलब्धि के साथ याद किया जाता है।

कुलमान घिसिङ ने जब नेपाल विद्युत प्राधिकरण की जिम्मेदारी संभाली थी, तब संस्था भारी घाटे में थी। लेकिन उनके कार्यकाल में न सिर्फ वित्तीय स्थिति सुधरी, बल्कि प्राधिकरण अरबों रुपये के मुनाफे में पहुंच गया। उस दौरान आम उपभोक्ताओं पर वैट लगाने का प्रस्ताव भी नहीं लाया गया और लंबे समय तक बिजली दर बढ़ाने की पहल भी नहीं की गई।

उनके कार्यकाल की एक बड़ी उपलब्धि यह भी मानी जाती है कि तिहार के लक्ष्मी पूजा जैसे अवसर पर, जब बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है, तब भी पूरे देश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई।

देश के लिए किए गए कामों की वजह से कुलमान घिसिङ को व्यापक सार्वजनिक समर्थन मिला था। बाद में उन्होंने काठमांडू निर्वाचन क्षेत्र–3 से प्रतिनिधि सभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। चुनाव परिणाम आने के बाद लंबे समय तक यह चर्चा होती रही कि केवल जनहित में काम करना ही चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त नहीं होता।

भीषण गर्मी के बीच बढ़ी बिजली की परेशानी

इस समय नेपाल के कई हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में बार-बार बिजली कटने, लो वोल्टेज और अनियमित आपूर्ति को लेकर लोगों की नाराजगी बढ़ती जा रही है।

प्रतिनिधि सभा में सांसद प्रकाश पाठक ने भी यही मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि कई क्षेत्रों में बिजली सेवा की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है और सरकार को इस पर गंभीरता से काम करना चाहिए।

इधर सरकार ने 50 यूनिट से अधिक बिजली खपत पर 5 प्रतिशत वैट लगाने का फैसला भी किया है। लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि बढ़ता खर्च देने के बावजूद उन्हें भरोसेमंद बिजली सेवा नहीं मिल रही।

कई इलाकों में बार-बार बिजली गुल होने और लो वोल्टेज की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। खोज समाचार को भी विभिन्न क्षेत्रों से पाठकों और दर्शकों ने व्हाट्सऐप के जरिए ऐसी शिकायतें भेजी हैं।

खेती और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर

इस साल सिर्फ नेपाल ही नहीं, दुनिया के कई देशों में रिकॉर्ड गर्मी देखी जा रही है। कई जगहों पर गर्मी से लोगों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं।

नेपाल के तराई क्षेत्र में स्थिति और चुनौतीपूर्ण बन गई है। अब मानसून का मौसम शुरू हो चुका है और खेती के लिए बिजली से चलने वाले मोटरों की जरूरत बढ़ गई है। लेकिन लो वोल्टेज के कारण सिंचाई प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि मोटर ठीक से नहीं चल रहे, जबकि बिजली का बिल लगातार बढ़ रहा है।

ऊर्जा प्रबंधन पर उठ रहे सवाल

फिलहाल ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ के पास है। उन्हें मंत्रालय संभाले 100 दिन से अधिक समय हो चुका है। हालांकि इस अवधि में नेपाल विद्युत प्राधिकरण की ओर से कोई बड़ी उपलब्धि सामने नहीं आने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

खोज समाचार का मानना है कि बिजली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है। यदि जरूरत हो तो कुलमान घिसिङ जैसे अनुभवी लोगों के अनुभव और सुझावों का भी उपयोग किया जाना चाहिए।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण पिछले कुछ वर्षों में देश के बेहतर प्रदर्शन करने वाले सरकारी संस्थानों में गिना जाने लगा था। ऐसे में उसकी कार्यक्षमता कमजोर पड़ने देना सरकार के लिए आसान विकल्प नहीं हो सकता।

भीषण गर्मी के इस दौर में लगातार सामने आ रही बिजली कटौती, लो वोल्टेज और सेवा प्रबंधन की समस्याओं पर सरकार, ऊर्जा मंत्रालय और नेपाल विद्युत प्राधिकरण को गंभीरता से काम करने की जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों का कहना है कि जब कुछ समय पहले तक बेहतर बिजली आपूर्ति संभव थी, तो अब केवल क्षमता की कमी का तर्क पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार और संबंधित संस्थाओं की कार्यशैली पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।