संसद में सांसद संतोष राजवंशी ने उठाया खाद संकट का मुद्दा

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नेपाल में इस साल भी किसान समय पर रासायनिक खाद नहीं मिलने की परेशानी से जूझ रहे हैं। धान की रोपाई के सबसे अहम दौर में तराई से लेकर पहाड़ी इलाकों तक कई किसानों का कहना है कि खाद की कमी और सिंचाई से जुड़ी दिक्कतों ने खेती की रफ्तार धीमी कर दी है। ऐसे में सरकार की तैयारी और कृषि प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं।

असार महीने का अंतिम दौर चल रहा है, लेकिन कई इलाकों में धान की रोपाई अभी भी उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सकी है। किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने से मोटर चलाना मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर खेतों में डालने के लिए जरूरी रासायनिक खाद भी समय पर उपलब्ध नहीं है।

यह मुद्दा अब संसद तक पहुंच गया है। मोरंग-4 से निर्वाचित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद संतोष राजवंशी ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाते हुए कहा कि किसान पैसे देकर खाद खरीदने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें जरूरत के समय खाद नहीं मिल रही है। उन्होंने इसे गंभीर स्थिति बताया।

हर सीजन लौट आती है वही समस्या

नेपाल में खाद की कमी कोई नई बात नहीं है। लगभग हर खेती के मौसम में किसान इसी परेशानी का सामना करते हैं। सरकारें बदलती रही हैं, लेकिन खाद आपूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। इस बार भी हालात में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।

आपूर्ति पर कई वजहों का असर

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां भी इस संकट के पीछे एक कारण हैं। मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, समुद्री परिवहन में बाधाएं और भारत, चीन तथा बांग्लादेश जैसे उत्पादक देशों द्वारा पहले अपनी घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने से खाद की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

हालांकि विशेषज्ञ सिर्फ बाहरी कारणों को जिम्मेदार नहीं मानते। उनका कहना है कि समय पर खरीद प्रक्रिया पूरी न होना, कमजोर आपूर्ति प्रबंधन और दीर्घकालिक योजना की कमी ने भी स्थिति को और मुश्किल बनाया है।

अनुदान नीति को लेकर भी चिंता

सरकार ने कृषि अनुदान नीति में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नई व्यवस्था में बड़े निवेश वाली कृषि परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसे लेकर आशंका जताई जा रही है कि छोटे और मध्यम किसान सरकारी सहायता से बाहर हो सकते हैं।

अब तक छोटे अनुदान कार्यक्रमों के जरिए बड़ी संख्या में किसानों को कुछ न कुछ सहयोग मिलता था। लेकिन ऐसे कार्यक्रम सीमित होने से ग्रामीण इलाकों के किसानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्थायी समाधान की मांग तेज

खाद संकट हर साल दोहराए जाने के बीच देश में ही रासायनिक खाद बनाने का उद्योग स्थापित करने की मांग फिर जोर पकड़ रही है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि पूरी तरह आयात पर निर्भर रहने से हर मौसम में अनिश्चितता बनी रहती है। इसलिए लंबे समय की नीति बनाकर घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम करना जरूरी है।

नेपाल की अर्थव्यवस्था में कृषि की बड़ी भूमिका है। ऐसे में यदि किसानों को समय पर खाद, सिंचाई और दूसरी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं तो इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इसलिए विशेषज्ञ तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान पर भी समान रूप से ध्यान देने की जरूरत बता रहे हैं।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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