बाढ़, डुबान और भूस्खलन जैसी आपदाओं में फंसे लोगों तक अब हेलिकॉप्टर, ड्रोन और राफ्ट की मदद से तेजी से पहुंचने की तैयारी की गई है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने इसके लिए निजी क्षेत्र की तीन संस्थाओं के साथ अलग-अलग समझौते किए हैं।
इस पहल का मकसद उन इलाकों में खोज और बचाव का काम आसान बनाना है, जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल होता है। बाढ़ से घिरी बस्तियों, नदी के बीच फंसे लोगों और तत्काल हवाई निगरानी की जरूरत वाले क्षेत्रों में उपलब्ध साधनों को जल्दी परिचालन में लाया जा सकेगा।
प्राधिकरण में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एयरलाइंस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ नेपाल, नेपाल ड्रोन एसोसिएशन और नेपाल एसोसिएशन ऑफ राफ्टिंग एजेंसीज यानी नारा के प्रतिनिधियों ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए।
काठमांडू घाटी में मुफ्त मिलेगी उड़ान सेवा
एयरलाइंस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ नेपाल के साथ हुए समझौते के मुताबिक, आपदा के समय काठमांडू घाटी के भीतर जरूरी उड़ान सेवा मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।
घाटी से बाहर किसी इलाके में खोज, बचाव या दूसरी आपदा कार्रवाई के लिए विमान या हेलिकॉप्टर की जरूरत पड़ती है तो सेवा न्यूनतम संचालन खर्च पर दी जाएगी। इससे राहत एजेंसियों को कम समय में दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आपदा के शुरुआती घंटों में रास्ते बंद होने या पुल टूटने के कारण राहत टीमों का प्रभावित जगह तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में हवाई सेवा घायलों को निकालने, बचाव दल पहुंचाने और जरूरी सामग्री ले जाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
ड्रोन, उपकरण और पायलट देगा ड्रोन संघ
नेपाल ड्रोन एसोसिएशन ने आपदा के समय प्राधिकरण की मांग पर ड्रोन, उससे जुड़े उपकरण और प्रशिक्षित पायलट मुफ्त उपलब्ध कराने पर सहमति दी है।
ड्रोन संचालन के लिए भेजे जाने वाले कर्मचारियों के आने-जाने और ठहरने की व्यवस्था प्राधिकरण करेगा।
प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर उपयोगी होगा। इससे जोखिम वाले स्थानों की पहचान की जा सकेगी और यह देखा जा सकेगा कि कहां लोग फंसे हैं, कौन-सा रास्ता खुला है और बचाव दल को किस दिशा से भेजना सुरक्षित रहेगा।
जिन इलाकों में जमीन से पहुंचना तत्काल संभव नहीं होता, वहां ड्रोन से मिली तस्वीरें और सूचनाएं राहत अभियान की योजना बनाने में मदद करेंगी।
नदी और बाढ़ वाले इलाकों में राफ्ट का सहारा
नारा के साथ हुए समझौते के तहत बाढ़, डुबान और नदी से जुड़ी आपदाओं में जरूरत पड़ने पर राफ्ट, जरूरी उपकरण और प्रशिक्षित जनशक्ति मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।
इन राफ्टों का इस्तेमाल फंसे हुए लोगों की खोज और बचाव के साथ-साथ दवाइयां तथा राहत सामग्री पहुंचाने में भी किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बचाव दल को प्रभावित इलाके तक ले जाने में भी राफ्टिंग से जुड़े प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद ली जाएगी।
तेज बहाव वाले नदी क्षेत्रों में सामान्य नाव चलाना कई बार जोखिम भरा होता है। ऐसे में नदी की प्रकृति समझने वाले प्रशिक्षित राफ्ट गाइड बचाव अभियान को सुरक्षित और प्रभावी बना सकते हैं।
एक साल के लिए हुआ समझौता
तीनों संस्थाओं के साथ हुआ समझौता एक वर्ष तक लागू रहेगा। जरूरत के आधार पर आपसी सहमति से इसकी अवधि बढ़ाई जा सकेगी।
प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख प्रदीप कुमार कोइराला ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकार के प्रयास से संभव नहीं है। सरकार, निजी क्षेत्र और समुदाय के बीच मजबूत तालमेल होने पर ही नुकसान कम किया जा सकता है।
उन्होंने खोज, बचाव और आपदा कार्रवाई में सहयोग के लिए निजी क्षेत्र की संस्थाओं का आभार जताया।
एयरलाइंस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ नेपाल के महासचिव मुरलीधर जोशी, नेपाल ड्रोन एसोसिएशन के अध्यक्ष राज विक्रम महर्जन और नारा के कार्यवाहक अध्यक्ष शिव अधिकारी ने भी आपदा में फंसे नागरिकों की जान और संपत्ति बचाने के लिए अपने-अपने क्षेत्र से जरूरी सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम में राष्ट्रीय आपातकालीन संचालन केंद्र के उपसचिव फणीन्द्र प्रसाद पौडेल के साथ संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण, सड़क विभाग, नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल नेपाल के प्रतिनिधि मौजूद थे।